International News: अमेरिका और रूस के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े अहम बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को H.R. 5334 यानी ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को कानून बनाया। इस कानून के तहत रूस पर प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ाया गया है, जबकि ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है।
इस कानून का सबसे ज्यादा असर रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर पड़ सकता है। भारत और चीन दुनिया के उन बड़े देशों में शामिल हैं, जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं। ऐसे में नए कानून के बाद दोनों देशों के साथ अमेरिका के व्यापार पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 100 प्रतिशत टैरिफ अभी भारत या चीन पर लागू नहीं हुआ है। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को इस तरह के अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देता है, लेकिन उसके लिए आगे प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत होगी।
क्या भारत पर लगेगा 100% टैरिफ?
नए कानून को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका भारत और चीन के सामान पर सीधे 100 फीसदी टैरिफ लगा देगा। कानून में रूस से जुड़े ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति को ऐसे देशों के खिलाफ 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की शक्ति मिल सकती है।
लेकिन फिलहाल इसे संभावित टैरिफ अथॉरिटी के तौर पर समझना जरूरी है, न कि भारत पर लग चुके 100 फीसदी शुल्क के तौर पर। यानी ट्रंप प्रशासन के पास कार्रवाई करने का रास्ता खुल गया है, लेकिन भारत से आने वाले सभी सामान पर 100 फीसदी अतिरिक्त शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू होने की घोषणा नहीं हुई है।
रूस से तेल खरीदता है भारत
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से मिलने वाले तेल की कीमत और उपलब्धता ने भारत की खरीद रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता है और वह अपनी जरूरतों के मुताबिक अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदता रहेगा। विदेश मंत्रालय ने रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर कहा था कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विविध स्रोतों से खरीद करता है और बदलते बाजार के अनुसार निर्णय लेता है।
यही वजह है कि नए अमेरिकी कानून को लेकर भारत की नजर इसके संभावित क्रियान्वयन और अमेरिकी प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
अमेरिका का निशाना रूस, लेकिन असर खरीदार देशों पर भी
इस कानून का घोषित उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में मॉस्को की आर्थिक क्षमता को प्रभावित करना है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से पहले कहा गया था कि कानून रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और रूस से जुड़े अन्य लोगों पर प्रतिबंधों को मजबूत करेगा। इसमें रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी शामिल है।
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, इस कानून का इस्तेमाल रूस को बातचीत और संभावित शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। साथ ही, ईरान पर लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है।
चीन के साथ भी बढ़ सकता है दबाव
भारत के साथ चीन भी रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीदने वाला देश है। इसलिए नए कानून का असर केवल भारत-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कारोबार करने वाले देशों के खिलाफ अतिरिक्त आर्थिक कदम उठाने का अधिकार मिलने के बाद वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच पहले से मौजूद व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, टैरिफ और अन्य रणनीतिक मुद्दों को लेकर बातचीत जारी है। इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप प्रशासन नए कानून में मिली शक्तियों का इस्तेमाल किस तरह करता है।
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भारत के लिए आगे क्या होगा?
फिलहाल भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिकी प्रशासन रूस से तेल खरीद को लेकर आगे क्या कदम उठाता है। अगर अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है तो इसका असर भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका किस तरह का शुल्क लगाता है, किन उत्पादों को इसके दायरे में रखता है और भारत के साथ इस मुद्दे पर क्या बातचीत होती है।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लग चुका है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इस कानून ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। अब निगाहें ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर हैं।



