Vishwakarma Puja: प्रयागराज के फाफामऊ क्षेत्र स्थित पंडिला में भगवान विश्वकर्मा महोत्सव बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। विश्वकर्मा समाज के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ आयोजन स्थल पर जुटनी शुरू हो गई थी।
शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम की शुरुआत वीरभानपुर से निकाली गई भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। मुन्ना विश्वकर्मा और अमरनाथ विश्वकर्मा के नेतृत्व में निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई पांडेश्वर नाथ धाम पहुंची।
रास्ते में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का अभिनंदन किया गया।
विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना
धाम पहुंचने के बाद भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और समाज की उन्नति की कामना की। पूजा के दौरान पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
वक्ताओं ने बताया पर्व का महत्व
मुख्य अतिथि डॉ. बिंदू विश्वकर्मा ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण और तकनीकी कौशल के प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी और समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने कहा कि यह पर्व श्रम, हुनर और रचनात्मकता का सम्मान करने का अवसर है। उन्होंने समाज के कारीगरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बताया।
सामाजिक एकता का दिया संदेश
उप निदेशक कृषि पवन विश्वकर्मा ने समाज को संगठित रहने और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही। वहीं अनिल विश्वकर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी सहयोग और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
संतोष विश्वकर्मा और पंकज मनु ने भी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भंडारे में शामिल हुए हजारों लोग
पूजा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में स्वामी लव पांचाल, लता विश्वकर्मा, पुष्पा विश्वकर्मा, पंकज विश्वकर्मा, संदीप विश्वकर्मा, ईश्वर चंद्र विश्वकर्मा, कमलेश शर्मा, आकाश, डॉ. वंशराज, डॉ. अमित, मनोज पांडेय, दूधनाथ पटेल सहित अनेक लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
विश्वकर्मा समाज के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव का भी संदेश दिया।



