Shankargarh: जिगना और बंधवा गांवों में रास्ते की समस्या को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहे भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रस्तावित पुतला दहन कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया है। जूही भागदेवा चौराहे पर चल रहे धरने के दौरान रविवार को प्रशासनिक अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।
किसान यूनियन की ओर से रास्ते के निर्माण की मांग को लेकर लगातार धरना दिया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने अपनी मांग पूरी नहीं होने पर पुतला दहन करने का कार्यक्रम तय किया था। इसी बीच मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया।
मौके पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी
धरना स्थल पर एसीपी बारा और शंकरगढ़ थाना प्रभारी पहुंचे। अधिकारियों ने भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों को सुना। किसानों ने जिगना और बंधवा गांवों में रास्ते के काम में हो रही देरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
मौके से ही अधिकारियों ने बारा के एसडीएम और शंकरगढ़ के बीडीओ से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क किया। बातचीत के बाद किसानों को जानकारी दी गई कि संबंधित रास्ते के काम को 11 अक्टूबर से शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
भरोसा मिलने के बाद टला पुतला दहन
प्रशासन की ओर से काम शुरू कराने का आश्वासन मिलने के बाद किसान यूनियन ने रविवार को प्रस्तावित पुतला दहन कार्यक्रम को स्थगित कर दिया। हालांकि, संगठन ने साफ किया कि धरना समाप्त नहीं किया गया है और आंदोलनकारी फिलहाल धरना स्थल पर ही बने रहेंगे।
किसान नेताओं का कहना है कि अब उनकी नजर 11 अक्टूबर पर रहेगी। यदि तय समय के अनुसार सड़क का काम शुरू होता है तो इसे प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासन की पूर्ति माना जाएगा।
12 अक्टूबर को होगी आगे की रणनीति तय
किसान यूनियन ने आंदोलन को लेकर अपनी अगली रणनीति भी तय कर ली है। संगठन के मुताबिक, 11 अक्टूबर को काम शुरू होने की स्थिति देखने के बाद 12 अक्टूबर को कोर कमेटी की बैठक होगी।
इस बैठक में धरना समाप्त करने, आगे जारी रखने या आंदोलन को नए तरीके से आगे बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा। यानी फिलहाल प्रशासन को दिए गए आश्वासन के आधार पर किसानों ने अपना एक कदम पीछे जरूर खींचा है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
बड़ी संख्या में किसान धरने में मौजूद
धरना स्थल पर रविवार को बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और यूनियन के कार्यकर्ता मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि ग्रामीणों के आवागमन से जुड़ी समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसके समाधान को लेकर वे लगातार प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि रास्ते का काम शुरू होने से जिगना और बंधवा सहित आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिलेगी। इसी मांग को लेकर यूनियन की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
कई पदाधिकारी रहे मौजूद
धरने और अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के दौरान भारतीय किसान यूनियन के जिला महासचिव सुरेंद्र सिंह एडवोकेट, तहसील अध्यक्ष बारा राजेश्वर सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष शंकरगढ़ यतेंद्र प्रताप सिंह सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इनके अलावा मान बहादुर सिंह, शिव नारायण सिंह, लल्लू प्रसाद, कन्हैया लाल, अर्जुन सिंह, चंद्रपाल सिंह, कृष्ण बहादुर सिंह, वीर बहादुर सिंह, लक्ष्मीकांत, अनिल, कमला प्रसाद और दीपु सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान व कार्यकर्ता धरना स्थल पर मौजूद रहे।
अब 11 अक्टूबर पर टिकी निगाहें
प्रशासन और किसान संगठन के बीच हुई बातचीत के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है। पुतला दहन स्थगित होने के बावजूद धरना जारी रहने से आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है।
अब किसानों की नजर 11 अक्टूबर को होने वाले सड़क कार्य पर है। यदि आश्वासन के मुताबिक काम शुरू होता है तो 12 अक्टूबर की कोर कमेटी बैठक में आंदोलन को लेकर अगला फैसला लिया जाएगा। वहीं यदि तय समय पर काम शुरू नहीं हुआ तो किसान यूनियन फिर से आंदोलन तेज करने की रणनीति पर विचार कर सकती है।



