Uttar Pradesh Politic: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज अयोध्या दौरे पर पहुंचेंगे। उनके अयोध्या आने से पहले ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अखिलेश यादव यहां एक श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में शामिल होने वाले हैं, लेकिन उनके इस दौरे को लेकर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। खास तौर पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।
अयोध्या में इस कार्यक्रम में शामिल होंगे अखिलेश यादव
जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव अयोध्या धाम के पास स्थित कृष्णापुर खानपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में शामिल होंगे। यह आयोजन समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के आवास पर हो रहा है।
अखिलेश के अयोध्या पहुंचने की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। अयोध्या में समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने उनके दौरे का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव उनके संसदीय क्षेत्र में आ रहे हैं और क्षेत्र की जनता की ओर से उनका स्वागत और अभिनंदन किया जाएगा।
अवधेश प्रसाद के बयान से साफ है कि समाजवादी पार्टी इस दौरे को धार्मिक कार्यक्रम में भागीदारी के तौर पर देख रही है। वहीं, बीजेपी और उसके सहयोगी दल इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।
ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर कसा तंज
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर ओम प्रकाश राजभर ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव भगवान राम और भगवान कृष्ण को लेकर केवल राजनीतिक बातें करते हैं, लेकिन धार्मिक स्थलों पर जाने से बचते हैं।
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव खुद को भगवान कृष्ण का वंशज बताते हैं, लेकिन मथुरा में दर्शन करने नहीं जाते और अयोध्या में भगवान राम के दर्शन के लिए भी नहीं जाते। राजभर ने इसके पीछे मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव को इस बात का डर है कि अगर वे राम मंदिर या दूसरे धार्मिक स्थलों पर जाएंगे तो उनका मुस्लिम समर्थन उनसे दूर हो सकता है। राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी एक तरफ मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश करती है और दूसरी तरफ हिंदू मतदाताओं को भी अपने साथ रखना चाहती है।
हालांकि, ये ओपी राजभर के राजनीतिक आरोप हैं और समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर अलग प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
ब्रजेश पाठक ने भी साधा निशाना
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का सनातन संस्कृति से कोई संबंध नहीं है और पार्टी केवल तुष्टिकरण की राजनीति करती है।
ब्रजेश पाठक ने अयोध्या आंदोलन और कारसेवकों से जुड़े पुराने राजनीतिक विवादों का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी केवल वोट की राजनीति करती है और इसी वजह से अखिलेश यादव राम मंदिर जाने से बचते हैं।
ब्रजेश पाठक के इस बयान से साफ है कि बीजेपी इस दौरे को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति के नजरिए से भी देख रही है।
क्या राम मंदिर जाएंगे अखिलेश यादव?
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह श्रीराम जन्मभूमि मंदिर जाकर रामलला के दर्शन करेंगे। फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक उनके आज के कार्यक्रम में राम मंदिर जाने की योजना तय नहीं है।
यही वजह है कि राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। अखिलेश यादव का अयोध्या जाना अपने आप में चर्चा का विषय है, लेकिन राम मंदिर में दर्शन को लेकर स्थिति अलग है। ऐसे में बीजेपी और उसके सहयोगी दल उनके दौरे को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी के लिए अयोध्या राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। फैजाबाद लोकसभा सीट से अवधेश प्रसाद की जीत के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा स्वाभाविक तौर पर राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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2027 चुनाव से पहले अयोध्या फिर बना सियासी अखाड़ा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में राम मंदिर, अयोध्या और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दे एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं।
अखिलेश यादव का धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना, ओपी राजभर की ओर से उन पर हमला और बीजेपी नेता ब्रजेश पाठक की प्रतिक्रिया ने इस दौरे को राजनीतिक बहस में बदल दिया है। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव अयोध्या से क्या संदेश देते हैं और क्या उनके दौरे के दौरान राम मंदिर जाने को लेकर कोई नया कार्यक्रम सामने आता है।
फिलहाल इतना तय है कि अखिलेश यादव के अयोध्या पहुंचने से पहले ही यूपी की सियासत गर्म हो चुकी है और 2027 के चुनावी माहौल में इस दौरे की राजनीतिक चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है।



