Azamgarh News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में 19 साल पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुद्री गांव में वर्ष 2007 में दशहरे के दिन दिनदहाड़े दो लोगों की गोली मारकर हत्या करने के मामले में कोर्ट ने स्थानीय ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह सहित 8 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत दोषियों की सजा की अवधि पर 29 अक्टूबर को फैसला सुनाएगी।
दशहरे के दिन गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा था गांव
मामला 21 अक्टूबर 2007 का है, जब दशहरे के दिन रुद्री गांव में वर्चस्व की लड़ाई और मां-बदाई से जुड़े विवाद को लेकर हमलावरों ने खूनी वारदात को अंजाम दिया था। लाइसेंसी राइफल, पिस्टल और अवैध असलहों से लैस हमलावरों ने पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह को निशाना बनाते हुए दौड़ा-दौड़ाकर गोलियां मारी थीं। इस ताबड़तोड़ गोलीबारी में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
ब्लॉक प्रमुख समेत 8 दोषी, एक आरोपी की हो चुकी है मौत
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रानी की सराय के ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह, राजेश सिंह, बलवंत सिंह, रणजीत सिंह, पंकज सिंह, राधेश्याम सिंह, लोकनाथ सिंह और जीवनप्रकाश सिंह को दोषी पाया। इस मुकदमे में कुल 9 लोग नामजद आरोपी थे, जिनमें से एक आरोपी शिवदास सिंह की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
17 गवाह और 19 साल की लंबी कानूनी लड़ाई
वादी पक्ष के अधिवक्ता विंध्यवासिनी सिंह ने बताया कि पीड़िता पक्ष को न्याय पाने में 19 साल का लंबा वक्त लगा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। आरोपियों की ओर से मुकदमे को लटकाने और कार्रवाई को प्रभावित करने के कई प्रयास किए गए। कई बार हाईकोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) लेकर सुनवाई को टालने की कोशिशें हुईं, लेकिन वादी पक्ष ने हिम्मत नहीं हारी और अदालत में मजबूती से पैरवी जारी रखी।
पुलिस ने कस्टडी में लेकर मंडलीय कारागार भेजा
अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद कोर्ट परिसर में गहमागहमी बढ़ गई। सुरक्षा के मद्देनजर शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय के नेतृत्व में पहुंची भारी पुलिस फोर्स ने सभी दोषियों को अदालत कक्ष से ही हिरासत में ले लिया। इसके बाद कड़े सुरक्षा घेरे में पुलिस वैन से सभी दोषियों को इटौरा स्थित मंडलीय कारागार भेज दिया गया।
मामले की संगीन प्रकृति को देखते हुए दोषियों को आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। अब 29 अक्टूबर को आने वाले सजा के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।



