Supreme Court: चुनाव आयोग के हलफनामे पर INDIA ब्लॉक को 10 दिन में देना होगा जवाब, नवंबर में अगली सुनवाई

ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई नवंबर के दूसरे सप्ताह तक टली। चुनाव आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही।

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े मामले में इंडिया ब्लॉक समेत सभी याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को नवंबर के दूसरे सप्ताह तक के लिए टाल दिया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े करीब 14 फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों के बावजूद लिए गए। वहीं, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

नवंबर के दूसरे सप्ताह में होगी अगली सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने इंडिया ब्लॉक और अन्य याचिकाकर्ताओं को निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे पर अपनी प्रतिक्रिया पेश करने का निर्देश दिया है।

इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना निर्वाचन आयोग की ओर से फैसले ले सकते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय है, इसलिए उसके कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सामूहिक विचार-विमर्श तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

अदालत में अब इस बात पर आगे विचार होगा कि विवादित फैसलों को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच की जरूरत है या नहीं और आयोग की निर्णय प्रक्रिया के संबंध में क्या निर्देश दिए जा सकते हैं।

चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?

निर्वाचन आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर याचिकाकर्ताओं के आरोपों को गलत बताया। आयोग के मुताबिक, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने इस दावे को भी खारिज किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा निर्णय लिए।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के बाद दाखिल अपीलों का मामला भी हलफनामे में उठाया गया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकारियों की ओर से 16.10 लाख अपीलें दाखिल की गईं। आयोग ने इन अपीलों को दाखिल करने के अपने फैसले के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया है।

इस तरह मामले में अब दोनों पक्षों के दावे अदालत के सामने हैं। जहां याचिकाकर्ता निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।

14 फैसलों को लेकर क्या हैं आरोप?

याचिकाकर्ताओं ने कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच एसआईआर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद रहे। दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस अवधि में कम से कम 14 फैसलों या कदमों पर आपत्तियां जताई थीं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की असहमति के बावजूद लिए गए, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसा करने के लिए संवैधानिक और कानूनी आधार क्या था। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है। निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में इन दावों को खारिज किया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग

राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में निर्वाचन आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि रिकॉर्ड की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित फैसले संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।

इस याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग भी की गई है। यह याचिकाकर्ता की मांग है; अदालत ने इस पर कोई अंतिम निर्णय सुनाया है, ऐसा इस खबर में उल्लेख नहीं है।

14 फैसले रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर दूसरी याचिका में कथित तौर पर एकतरफा लिए गए 14 फैसलों को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल गठित करने की मांग की गई है।

याचिका में साइबर सुरक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञों को भी जांच प्रक्रिया में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विवादित फैसलों और उनकी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच से मामले के तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं। इन मांगों पर अदालत का फैसला आना अभी बाकी है।

MLC Election Results 2026: यूपी, बिहार समेत 4 राज्यों की 28 सीटों पर मतगणना शुरू, नतीजों पर टिकी निगाहें

राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक की याचिका भी मामले में शामिल

राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी निर्वाचन आयोग के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया को लेकर याचिका दायर की है। इन याचिकाओं में भी मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका, आयोग के बहुसदस्यीय ढांचे और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।

मामले में अब अगली सुनवाई नवंबर के दूसरे सप्ताह में होगी। उससे पहले याचिकाकर्ताओं को निर्वाचन आयोग के हलफनामे पर जवाब देना है। इसके बाद अदालत दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी। फिलहाल यह मामला निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया, उसकी संस्थागत जवाबदेही और एसआईआर से जुड़े विवादों के कारण महत्वपूर्ण बना हुआ है।

Related Articles