Ram Mandir Chadhawa Chori Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में महिपाल सिंह का बड़ा दावा, चंपतराय को क्लीन चिट देने की तैयारी का लगाया आरोप

राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी और स्टार गवाह महिपाल सिंह ने चढ़ावे की गिनती से लेकर दान की एंट्री तक कई गंभीर सवाल उठाए, बोले- पुरानी SIT चंपतराय और डॉ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट नहीं दे सकती।

Ram Mandir Chadhawa Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा और दान की रकम में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी और मामले के चर्चित गवाह महिपाल सिंह ने कई गंभीर दावे किए हैं। महिपाल सिंह का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पुराने मामलों में पूर्व महासचिव चंपतराय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाली बैठक को चंपतराय की वापसी की पृष्ठभूमि तैयार करने से जोड़कर देखा जा सकता है।

महिपाल सिंह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और राम मंदिर निर्माण निधि संग्रह अभियान में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। राजस्थान के कोटा में जन्मे महिपाल ने किशोरावस्था से ही संघ की गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में करीब चार दशक तक काम किया। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वह फिर से संघ के कार्यों में सक्रिय हुए और राम मंदिर निर्माण निधि संग्रह अभियान में कोटा विभाग के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली।

राम मंदिर ट्रस्ट में भी महिपाल सिंह को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें लेखा प्रभारी के साथ सह कार्यालय प्रमुख का दायित्व सौंपा गया था। उनका कहना है कि जनवरी 2021 से जुलाई 2022 के बीच उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय कार्यों को करीब से देखा। हालांकि, मार्च 2022 में उन्हें चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया से अलग कर दिया गया था। यही वजह है कि मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर उनके दावे काफी अहम माने जा रहे हैं।

महिपाल सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट में कई तरह की आपत्तियां दर्ज की गई थीं, लेकिन इनका पूरी तरह समाधान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि चढ़ावे की गणना के लिए रखे गए कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में थी। उन्होंने कहा कि वाराणसी की एक एजेंसी के जरिए गणनाकर्मियों को रखा गया था और इन नियुक्तियों में चंपतराय तथा टिन्नू यादव की भूमिका होने का उन्होंने दावा किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गणना करने वाले कुछ कर्मचारियों के पास बैंकिंग से संबंधित पर्याप्त अनुभव नहीं था। महिपाल सिंह के मुताबिक, चढ़ावे की गिनती के दौरान नोटों के बंडलों की संख्या और रकम को लेकर भी गड़बड़ियां सामने आई थीं। हालांकि, ये सभी दावे महिपाल सिंह के आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

महिपाल सिंह ने दान पेटियों से निकलने वाली सोने-चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं की एंट्री और रसीदों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की पारदर्शी तरीके से गणना और रिकॉर्डिंग बेहद जरूरी है, क्योंकि यह श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था और ऑडिट प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

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सबसे बड़ा दावा उन्होंने चंपतराय को लेकर किया है। महिपाल सिंह ने कहा कि पुरानी SIT ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट नहीं दे सकती। उनका आरोप है कि दो सितंबर को प्रस्तावित बैठक के मद्देनजर चंपतराय की वापसी के लिए क्लीन चिट की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि संबंधित पक्षों या किसी आधिकारिक दस्तावेज से होना अभी बाकी है।

महिपाल सिंह ने खुद को किसी राजनीतिक दल से प्रेरित होने से इनकार करते हुए कहा कि उनका वैचारिक जुड़ाव संघ से रहा है। उन्होंने संघ और विश्व हिंदू परिषद में कई जिम्मेदारियां निभाने का भी उल्लेख किया। इसी वजह से वह इस पूरे मामले में अपनी बात को तथ्यों और अपने अनुभव के आधार पर रखने का दावा कर रहे हैं।

राम मंदिर निर्माण की लागत को लेकर भी महिपाल सिंह ने बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये बताई गई थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 2,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी को लेकर भी उन्होंने पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही की जरूरत बताई।

राम मंदिर से जुड़ा चढ़ावा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय है। ऐसे में दान, चढ़ावे, सोने-चांदी और निर्माण खर्च से जुड़े किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। महिपाल सिंह के ताजा दावों के बाद अब निगाहें ट्रस्ट की अगली बैठक और जांच से जुड़े आधिकारिक रुख पर टिकी हैं। फिलहाल महिपाल सिंह के आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

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