Bengal Politics: कैमक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय में हुई कथित तोड़फोड़ की घटना पर अब पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा भी खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को भाजपा और कोलकाता पुलिस की मिलीभगत करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। मोइत्रा का कहना है कि पुलिस अब उन्हें अपने ही पार्टी दफ्तर में जाने तक नहीं दे रही।
सुबह साढ़े चार बजे हुई घुसपैठ
महुआ मोइत्रा के मुताबिक, यह पूरी घटना सुबह करीब साढ़े चार बजे की है, जब करीब 20 से 25 भाजपा कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय में जबरन दाखिल हुए। उन्होंने बताया कि लिफ्ट के सीसीटीवी फुटेज में यह पूरा वाकया कैद हो चुका है। सबसे पहले इन लोगों ने वहां तैनात सिक्योरिटी गार्ड्स से मोबाइल फोन छीन लिए और उन्हें लंबी मेटल रॉड से सिर फोड़ने की धमकी दी।
मोइत्रा ने साफ कहा कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दी गई थी। उनके मुताबिक, फुटेज में हमलावर मास्क पहनकर आते हुए साफ नजर आ रहे हैं। गार्ड्स को धमकाने के बाद ये लोग सीधे छठी और सातवीं मंजिल पर पहुंचे, जहां पार्टी का कार्यालय स्थित है, और वहां घुसकर तबाही मचानी शुरू कर दी।
टीवी, प्रिंटर, स्कैनर सब तोड़ डाला
सांसद ने बताया कि अंदर घुसते ही इन लोगों ने भारी तोड़फोड़ की। दफ्तर में रखा टीवी, प्रिंटर और स्कैनर तक तोड़ डाला गया। इतना ही नहीं, हर कमरे के दराज खोलकर वहां रखे दस्तावेज भी निकाल लिए गए।
मोइत्रा ने एक चौंकाने वाला दावा भी किया। उनके अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखता है कि हमलावरों ने कैमरों के तार काट दिए थे, ताकि उनकी हरकतें रिकॉर्ड न हो सकें। लेकिन कुछ कैमरों के तार वे काटना भूल गए, और उन्हीं में साफ नजर आ रहा है कि एयर प्यूरीफायर और टीवी जैसे सामान चोरी करके ले जाए गए हैं।
दो घंटे तक नहीं पहुंची एक भी पुलिस
महुआ मोइत्रा ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, जब यह पूरी घटना हो रही थी, यानी सुबह साढ़े चार से साढ़े छह बजे के बीच, पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस को बार-बार फोन किया, लेकिन इतने लंबे समय तक कोई भी पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
हैरानी की बात यह रही कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने खुद ही छह हमलावरों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। अब पुलिस का दावा है कि उसने छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मोइत्रा ने कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता कि गिरफ्तार किए गए लोग असल में कौन हैं। इसके उलट पुलिस अब तेजी दिखाते हुए पूरी जगह को सील कर चुकी है, और टीएमसी कार्यकर्ताओं को भी वहां जाने की इजाजत नहीं दी जा रही।
‘यह पुलिस और भाजपा का ज्वाइंट ऑपरेशन है’
टीएमसी सांसद ने इस पूरे घटनाक्रम को कोलकाता पुलिस और भाजपा का सुनियोजित संयुक्त अभियान बताया। उनका कहना है कि पुलिस के सील करने के बाद असल मकसद सिर्फ यही है कि किसी तरह टीएमसी को उसी दफ्तर से बाहर निकाल दिया जाए।
मोइत्रा ने आरोप लगाते हुए बताया कि इससे पहले भी दो दिन पहले बिलबोर्ड जांच के बहाने पुलिस के साथ कुछ लोग कार्यालय में घुस आए थे। इसके बाद फिर एक दिन फायर ब्रिगेड इंस्पेक्शन के नाम पर अंदर दाखिल हुई। उनके मुताबिक, इन सभी घटनाओं का एक ही मकसद नजर आता है — टीएमसी को उस दफ्तर से बेदखल करना।
‘बंगाल से टीएमसी का नामोनिशान मिटाने की धमकी’
सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि राज्य के उपमुख्यमंत्री ने खुले तौर पर कह दिया है कि बंगाल से तृणमूल कांग्रेस का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घर से बाहर तक नहीं निकलने देने की बात कही गई है।
मोइत्रा के मुताबिक, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है, ताकि वे घर छोड़ने पर मजबूर हो जाएं या फिर उन्हें जेल भेजने की कोशिश की जा रही है।
आगे क्या
फिलहाल टीएमसी कार्यालय पुलिस द्वारा सील किया जा चुका है, और पार्टी कार्यकर्ताओं को अंदर जाने की इजाजत नहीं मिल रही। इस पूरे विवाद पर भाजपा या कोलकाता पुलिस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं टीएमसी नेतृत्व इस मामले को लेकर राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्रालय और अदालत तक ले जाने की तैयारी में जुटा है।



