अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दाखिल चार्जशीट को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मामले की शुरुआती कार्रवाई में यूएपीए के तहत केस दर्ज होने के बावजूद आरोपपत्र में इस कानून की धाराएं शामिल नहीं की गईं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसके पीछे किसी तरह का अमेरिकी दबाव था।
मामला म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर प्रशिक्षण, हथियार और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने से जुड़ा है। NIA ने इस मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक समेत छह यूक्रेनी नागरिकों को आरोपी बनाया है। शुरुआत में मामला यूएपीए के तहत दर्ज किया गया था, लेकिन हाल में दाखिल आरोपपत्र में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गई हैं।
जयराम रमेश ने उठाया अमेरिकी दबाव का सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार और NIA की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या यूएपीए से जुड़ी धाराएं हटाने का फैसला स्वतंत्र जांच के आधार पर हुआ या किसी बाहरी दबाव के कारण ऐसा किया गया।
जयराम रमेश ने यह भी सवाल किया कि यदि अमेरिकी नागरिक के खिलाफ आतंकवाद से जुड़े आरोपों में बदलाव किया गया है, तो इसके पीछे क्या वजह है और भारत को इससे क्या हासिल होने की उम्मीद है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया।
NIA की चार्जशीट में क्या है?
NIA ने मार्च 2026 में दर्ज मामले में मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ राउज एवेन्यू स्थित अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। इस चार्जशीट में यूएपीए की धाराओं के बजाय विदेशियों से संबंधित कानून की धारा 21 और 23 का उल्लेख किया गया है।
NIA की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी के मुताबिक, यदि आगे की जांच में यूएपीए के तहत कोई अपराध सामने आता है, तो उस आधार पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है। मामले में अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।
सातों आरोपियों पर क्या आरोप हैं?
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों पर म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और हथियार तथा कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण उपलब्ध कराने का आरोप है। NIA ने इसी आधार पर मामले की जांच शुरू की थी।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक के अलावा जिन छह यूक्रेनी नागरिकों को आरोपी बनाया गया है, उनमें हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं।
वैनडाइक को मार्च 2026 में कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उन्हें एक सुरक्षा कंपनी से जुड़े व्यक्ति और युद्ध संबंधी विशेषज्ञ के रूप में भी बताया गया है।
परिवार ने अमेरिकी सरकार से की थी हस्तक्षेप की मांग
इस बीच वैनडाइक के परिवार की ओर से चलाए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट से अमेरिकी सरकार से मामले में राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। परिवार ने उनकी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए दावा किया था कि उन्हें जेल में बुनियादी सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल रहे हैं।
वहीं, NIA का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे की जांच के आधार पर कानूनी धाराओं में बदलाव संभव है। ऐसे में फिलहाल इस मामले में कांग्रेस के आरोपों के साथ-साथ जांच एजेंसी का पक्ष भी सामने है। अब निगाहें आगे की जांच और अदालत में होने वाली कार्यवाही पर टिकी हैं।



