food oil price: देशभर में लोग दशहरा, छठ पूजा और दीवाली की तैयारियों में जुटे हैं। हालांकि इसी बीच महंगाई को लेकर एक और चिंता सामने आ गई है। बाजार से जुड़े संकेत बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर सीधे आम परिवारों की रसोई पर पड़ेगा।
पिछले कुछ महीनों में कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ चुके हैं। अब खाद्य तेल भी महंगे होने की राह पर दिखाई दे रहे हैं। उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि कीमतों में 7 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
विदेशी बाजार का असर भारत पर
भारत खाद्य तेल की जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिलता है।
हाल के सप्ताहों में वैश्विक बाजार में खाद्य तेलों की लागत बढ़ी है। इसके अलावा शिपिंग खर्च, बीमा शुल्क और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति ने भी आयात को महंगा बना दिया है।
पहले ही बढ़ चुके हैं दाम
इस साल मार्च के बाद खाद्य तेलों की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है। कंपनियां पहले ही कई उत्पादों के दाम बढ़ा चुकी हैं। अब यदि नया मूल्य संशोधन लागू होता है तो उपभोक्ताओं को तीसरी बार महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में अतिरिक्त खर्च को ग्राहकों तक पहुंचाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
त्योहारों में बढ़ती है खपत
त्योहारी सीजन के दौरान घरों से लेकर मिठाई और स्नैक्स उद्योग तक खाद्य तेल की मांग बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस समय कीमतों में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी उपभोक्ताओं की जेब पर ज्यादा असर डालती है।
दशहरा, छठ और दीवाली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान परिवारों का खर्च पहले ही बढ़ जाता है। ऐसे में खाद्य तेल महंगा होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
आगे बाजार पर रहेगी नजर
फिलहाल खाद्य तेल कंपनियों की ओर से किसी बड़े मूल्य संशोधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि उद्योग जगत में बढ़ती लागत को लेकर चर्चा तेज है। आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की चाल और आयात खर्च यह तय करेंगे कि उपभोक्ताओं को कितना अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।
महंगाई के इस दौर में खाद्य तेल की कीमतों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह हर घर की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा हुआ उत्पाद है।



