Air Pollution: देश के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। 7 नवंबर को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-NCR के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद ऊंचा दर्ज किया गया। नोएडा में AQI 788 और गुरुग्राम में 808 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई, जबकि दिल्ली में भी वायु गुणवत्ता का स्तर 674 बताया गया।
दिल्ली-NCR के मुकाबले देश के दूसरे बड़े शहरों में प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा। कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में अलग-अलग स्तर का AQI दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि महानगरों में वायु गुणवत्ता की स्थिति एक जैसी नहीं है और कई शहरों में प्रदूषण का दबाव अधिक बना हुआ है।
नोएडा और गुरुग्राम में सबसे ज्यादा प्रदूषण
प्रदूषण से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों में नोएडा और गुरुग्राम की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई गई है। नोएडा में लाइव AQI 788 दर्ज किया गया। यहां PM2.5 का स्तर 470 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM10 का स्तर 513 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बताया गया।
वहीं, गुरुग्राम में AQI 808 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। दिल्ली में भी AQI 674 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों के आधार पर दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
देश के प्रमुख शहरों में कितना रहा AQI?
दिल्ली-NCR के अलावा देश के कई बड़े शहरों में भी वायु गुणवत्ता की स्थिति अलग-अलग रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता और हैदराबाद में AQI 200 से नीचे रहा, जबकि पुणे, अहमदाबाद और मुंबई में भी प्रदूषण का स्तर दर्ज किया गया।
प्रमुख शहरों में सामने आए AQI के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| शहर | AQI |
|---|---|
| गुरुग्राम | 808 |
| नोएडा | 788 |
| नई दिल्ली | 674 |
| कोलकाता | 182 |
| हैदराबाद | 172 |
| पुणे | 167 |
| अहमदाबाद | 164 |
| मुंबई | 152 |
| चेन्नई | 122 |
| बेंगलुरु | 102 |
इन आंकड़ों में दिल्ली-NCR के शहरों का स्तर अन्य महानगरों की तुलना में काफी अधिक बताया गया है। हालांकि, AQI का स्तर समय, स्थान और निगरानी स्टेशन के अनुसार बदल सकता है।
PM2.5 और PM10 का बढ़ना क्यों है खतरनाक?
वायु प्रदूषण को मापने में PM2.5 और PM10 जैसे कणों की अहम भूमिका होती है। PM2.5 बेहद सूक्ष्म कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। वहीं, PM10 अपेक्षाकृत बड़े कण होते हैं, जो सांस लेने के दौरान शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
इन कणों का स्तर बढ़ने पर सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, खांसी और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पहले से सांस या हृदय संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
प्रदूषण बढ़ने पर किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
खराब हवा का असर हर व्यक्ति पर पड़ सकता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए इसका जोखिम अधिक होता है। इनमें बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोग शामिल हैं।
ऐसे मौसम में लोगों को बाहर व्यायाम करने से बचना चाहिए, खासकर तब जब स्थानीय स्तर पर प्रदूषण का आंकड़ा बहुत अधिक हो। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला और सही फिटिंग वाला मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। घर के भीतर धूल और धुएं को कम रखने की कोशिश भी करनी चाहिए।
प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें?
वायु गुणवत्ता खराब होने पर कुछ सावधानियां अपनाकर प्रदूषण के संपर्क को कम किया जा सकता है।
- प्रदूषण अधिक होने पर सुबह और शाम बाहर की गतिविधियां सीमित रखें।
- खुले में दौड़ने या कठिन शारीरिक व्यायाम से बचें।
- जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें।
- बच्चों और बुजुर्गों को लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से बचाएं।
- अस्थमा या सांस की बीमारी वाले मरीज अपनी निर्धारित दवाएं और उपचार जारी रखें।
- घर में धूम्रपान, कचरा जलाने और धूल उड़ने जैसी गतिविधियों से बचें।
- स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सलाह का पालन करें।
दिल्ली-NCR की हवा पर नजर रखना जरूरी
दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में सामने आए ऊंचे प्रदूषण आंकड़ों ने एक बार फिर वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, देश के अन्य महानगरों में AQI का स्तर अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया।
वायु प्रदूषण का वास्तविक आकलन करने के लिए अलग-अलग निगरानी केंद्रों के आंकड़ों, मौसम की स्थिति और प्रदूषण के स्रोतों को ध्यान में रखना जरूरी है। लोगों को अपने शहर का ताजा AQI देखकर ही बाहर की गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।



