Indo Tibetan Border Police: दीपावली के पावन अवसर पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) के हिमवीरों ने मानवता और समाजसेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया। ITBP के पूर्वी फ्रंटियर की ओर से धनतेरस और छोटी दीपावली के अवसर पर विशेष रक्तदान अभियान चलाया गया। इस पहल में करीब 5,000 जवानों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों की मदद का संकल्प लिया।
पूर्वी फ्रंटियर के महानिरीक्षक (IG) के. संजय कुमार, IPS के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य दीपावली के पर्व को सामाजिक जिम्मेदारी और जीवन बचाने के संदेश से जोड़ना था। इसके लिए “एक घर दीप जले, एक रक्तदान से जिंदगी मिले” का प्रेरक संदेश दिया गया।
छह राज्यों और दिल्ली में एक साथ आयोजित हुए शिविर
ITBP पूर्वी फ्रंटियर का यह अभियान उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित छह राज्यों तथा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चलाया गया। इन क्षेत्रों में बल की विभिन्न वाहिनियों और प्रतिष्ठानों के माध्यम से रक्तदान शिविर आयोजित किए गए।
अभियान में करीब 5,000 हिमवीरों की भागीदारी रही। जवानों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर यह संदेश दिया कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी सामाजिक दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
‘एक घर दीप जले, एक रक्तदान से जिंदगी मिले’ बना अभियान का संदेश
इस अभियान की खास बात इसका प्रेरणादायी संदेश रहा। दीपावली पर घरों में दीप जलाने के साथ किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान करने की अपील की गई।
रक्त की जरूरत दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, ऑपरेशन और अन्य चिकित्सा परिस्थितियों में पड़ सकती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान जरूरतमंद मरीजों के लिए मददगार साबित होता है। ITBP के हिमवीरों ने इसी भावना के साथ अभियान में हिस्सा लिया।
IG के. संजय कुमार के नेतृत्व में हिमवीरों की भागीदारी
ITBP पूर्वी फ्रंटियर के महानिरीक्षक के. संजय कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस पहल में अलग-अलग राज्यों में तैनात जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। करीब 5,000 हिमवीरों का रक्तदान अभियान के व्यापक स्तर और बल की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस पहल के जरिए बल ने त्योहार के अवसर पर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया।
मानवता और सेवा भावना को समर्पित रही दीपावली
ITBP के इस अभियान ने दीपावली के पारंपरिक उत्सव को समाजसेवा के उद्देश्य से जोड़ने का प्रयास किया। जवानों ने रक्तदान के माध्यम से यह संदेश दिया कि किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में दिया गया योगदान भी रोशनी और खुशियां बांटने का एक तरीका है।
करीब 5,000 हिमवीरों की सहभागिता के साथ आयोजित यह अभियान त्योहार के दौरान सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना का संदेश देने वाली पहल के रूप में सामने आया।



