Cooler Rust: नया रंग कराने के बाद भी कूलर में लग रही जंग तो समझें ये गलती हो रही

Cooler Rust: जंग हटाए बिना पेंट करना पड़ सकता है भारी, कूलर की लंबी उम्र के लिए अपनाएं ये तरीके

Cooler Rust: कूलर का इस्तेमाल पानी और हवा दोनों के साथ होता है। खासकर लोहे की बॉडी वाले कूलर में लगातार नमी बनी रहने पर धातु के जंग पकड़ने का खतरा बढ़ जाता है। अगर पेंट की सतह पर कहीं खरोंच आ गई हो या कोटिंग उखड़ गई हो, तो उस जगह से नमी धातु तक पहुंच सकती है।

यही वजह है कि कई बार नया रंग कराने के कुछ समय बाद ही कूलर की बॉडी पर फिर से लाल-भूरे निशान नजर आने लगते हैं। धातु की सतह पर जमा गंदगी और पानी में मौजूद घुले पदार्थ भी समस्या को बढ़ा सकते हैं। कूलिंग सिस्टम में पानी की गुणवत्ता, नमी और जमा पदार्थों का धातु पर असर पड़ना एक जाना-पहचाना कारक है।

जंग पर सीधे पेंट करना पड़ सकता है महंगा

अगर कूलर की बॉडी पर पहले से जंग लगी हुई है तो उसके ऊपर सीधे पेंट कर देना सही तरीका नहीं है। सबसे पहले जंग लगी और उखड़ी हुई पुरानी परत को हटाना जरूरी है।

सैंडपेपर या उपयुक्त वायर ब्रश से ढीली जंग साफ करने के बाद सतह से धूल और गंदगी हटाएं। इसके बाद सतह को पूरी तरह सूखने दें। जरूरत के अनुसार मेटल प्राइमर लगाने के बाद पेंट किया जाए तो नई कोटिंग को बेहतर आधार मिल सकता है।

कूलर में जमा पानी भी बन सकता है परेशानी की वजह

कूलर का इस्तेमाल खत्म होने के बाद अगर टंकी में पानी भरा रह जाए तो लंबे समय तक नमी बनी रहती है। यही नमी धातु की सतह पर जंग की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है।

इसलिए जब कूलर कुछ दिनों के लिए इस्तेमाल में नहीं आने वाला हो तो टैंक को खाली कर दें। सीजन खत्म होने पर तो इसे अच्छी तरह साफ करके पूरी तरह सुखाना और भी जरूरी हो जाता है।

पानी में मौजूद मिनरल्स का भी रखें ध्यान

कूलर में इस्तेमाल होने वाले पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और दूसरे घुले हुए पदार्थ हो सकते हैं। पानी के वाष्पित होने पर इनमें से कुछ पदार्थ सतह पर जमा हो सकते हैं। हार्ड वाटर के कारण कूलर के अंदर सफेद या अन्य तरह की मिनरल परत दिखाई देना आम समस्या हो सकती है।

ऐसे में केवल टैंक की सफाई ही नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर बार-बार मोटी परत जम रही है या पंप और टैंक में जमा पदार्थ दिखाई दे रहे हैं, तो पानी की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

TDS का मतलब क्या है?

पानी की गुणवत्ता की बात आते ही TDS यानी Total Dissolved Solids का नाम सामने आता है। यह पानी में मौजूद घुले हुए ठोस पदार्थों की कुल मात्रा का संकेत देता है और आमतौर पर ppm में मापा जाता है।

उदाहरण के तौर पर 100 ppm TDS का मतलब लगभग 100 मिलीग्राम प्रति लीटर घुले हुए पदार्थों की मात्रा है। लेकिन सिर्फ TDS की संख्या देखकर पानी की पूरी गुणवत्ता तय नहीं की जा सकती। इसमें कौन-कौन से पदार्थ मौजूद हैं, पानी की कठोरता और अन्य रासायनिक गुण भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए कूलर में जंग लगने का कारण केवल TDS के किसी एक स्तर को मानना सही नहीं होगा।

कूलर की जंग रोकने के लिए अपनाएं ये तरीके

1. जंग को शुरुआत में ही साफ करें

छोटे-छोटे जंग के निशान दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज न करें। शुरुआत में सफाई और कोटिंग करना आसान होता है।

2. पेंट से पहले सतह तैयार करें

पुराना पेंट, जंग और ढीली परत हटाने के बाद ही नई कोटिंग करें। गंदी या गीली सतह पर पेंट करने से उसका टिकाव प्रभावित हो सकता है।

3. प्राइमर का इस्तेमाल करें

मेटल की सतह के लिए उपयुक्त एंटी-रस्ट प्राइमर इस्तेमाल करने से पेंटिंग से पहले अतिरिक्त सुरक्षा परत मिल सकती है।

4. टैंक की नियमित सफाई करें

कूलर की टंकी में जमा गंदगी, मिनरल डिपॉजिट और अन्य अवशेषों को समय-समय पर साफ करें। जमा पदार्थों को नियंत्रित करना धातु और कूलर की कार्यक्षमता दोनों के लिए उपयोगी है।

5. इस्तेमाल के बाद पानी निकाल दें

लंबे समय तक कूलर बंद रखना है तो उसमें पानी जमा न रहने दें। टैंक और अंदर के हिस्सों को धोकर अच्छी तरह सुखाकर रखें।

500 ppm TDS से ऊपर हो तो क्या करें?

अगर घर के पानी की TDS रीडिंग लगातार ज्यादा आ रही है तो केवल इस आंकड़े के आधार पर पानी को खराब या खतरनाक मानना उचित नहीं है। TDS में कई सामान्य मिनरल्स और लवण भी शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, बहुत ज्यादा घुले हुए पदार्थ होने पर कूलर के अंदर जमाव की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में पानी की पूरी गुणवत्ता, खासकर हार्डनेस और अन्य जरूरी पैरामीटर की जांच कराना ज्यादा उपयोगी रहेगा।

क्या कूलर में RO का पानी इस्तेमाल करना चाहिए?

सिर्फ कूलर के लिए RO लगाना या हर स्थिति में RO का पानी इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। पानी का चुनाव स्थानीय पानी की गुणवत्ता और कूलर की स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।

अगर पानी में मिनरल डिपॉजिट बहुत ज्यादा बन रहा है तो फिल्ट्रेशन या पानी की गुणवत्ता में सुधार के विकल्पों पर विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है। सिर्फ TDS की रीडिंग देखकर किसी एक प्यूरीफिकेशन सिस्टम का चुनाव करना सही तरीका नहीं है।

सीजन खत्म होने पर ऐसे रखें कूलर

कूलर को लंबे समय तक बंद रखना है तो सबसे पहले उसका पानी पूरी तरह निकालें। टैंक और अंदर के हिस्सों को साफ करके सुखाएं। जंग वाले हिस्सों की पहचान करके उनकी सफाई और जरूरत के अनुसार कोटिंग करा लें।

कूलर को सूखी जगह पर रखने से लगातार नमी के संपर्क को कम किया जा सकता है। नियमित सफाई और सही तरीके से स्टोरेज करने से कूलर की बॉडी और दूसरे हिस्सों की देखभाल बेहतर तरीके से की जा सकती है।

Bottom Line

कूलर की जंग रोकने के लिए केवल नया रंग कराना पर्याप्त नहीं है। पुरानी जंग हटाना, सतह को सूखा रखना, सही प्राइमर और पेंट का इस्तेमाल, पानी की नियमित निकासी और समय-समय पर टैंक की सफाई ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। पानी में मौजूद घुले पदार्थों से बनने वाले जमाव को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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