Pakistan Crisis: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और शहबाज शरीफ सरकार के बीच चल रही बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। कई घंटे चली वार्ता के बाद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बरकरार रहा। बातचीत विफल होने के बाद PTI ने इस्लामाबाद की ओर अपना लॉन्ग मार्च जारी रखने का फैसला किया है। दूसरी ओर, सरकार ने राजधानी में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश को रोकने की चेतावनी दी है। इसके चलते इस्लामाबाद और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है।
पूरी रात चली बातचीत, नहीं निकला कोई रास्ता
सरकार और PTI के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दूसरा दौर शनिवार शाम करीब चार बजे शुरू हुआ था। वार्ता कई घंटे तक चली और रविवार सुबह समाप्त हुई। हालांकि, दोनों पक्ष किसी साझा सहमति तक नहीं पहुंच सके।
PTI ने इससे पहले 27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च का ऐलान किया था। बाद में सरकार की ओर से बढ़ाई गई सख्ती के बीच मार्च की तारीख को 4 अक्टूबर तक टाल दिया गया था। अब बातचीत टूटने के बाद पार्टी ने अपना आंदोलन आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
PTI की प्रमुख मांगों में इमरान खान से तत्काल मुलाकात और उनके निजी डॉक्टर को स्वास्थ्य जांच की अनुमति देना शामिल है। पार्टी का कहना है कि इमरान खान से उनके परिजनों और डॉक्टर को मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इमरान खान से मुलाकात पर क्यों अटका मामला?
बातचीत में सबसे बड़ा गतिरोध इमरान खान से मुलाकात के मुद्दे पर रहा। PTI पहले इमरान खान से मुलाकात और उनके निजी डॉक्टर को जांच की अनुमति देने की मांग पर कायम रही। वहीं सरकार का रुख था कि पहले PTI को लॉन्ग मार्च और प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान करना चाहिए, उसके बाद मुलाकात के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।
यही शर्त दोनों पक्षों के बीच सहमति की राह में सबसे बड़ी बाधा बन गई। सरकार को यह आशंका भी बताई गई कि इमरान खान से मुलाकात के बाद वह अपने समर्थकों को आंदोलन जारी रखने का संदेश दे सकते हैं। हालांकि, इसे सरकार की आधिकारिक वजह के तौर पर पेश नहीं किया गया है।
बातचीत में खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद से निपटने और केंद्र तथा प्रांतीय सरकार की भूमिका को लेकर भी मतभेद सामने आए। इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
PTI की इमरान खान को लेकर क्या मांगें हैं?
इमरान खान 2023 से जेल में हैं और फिलहाल रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। PTI लगातार उनके स्वास्थ्य और जेल में मुलाकात से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है।
पार्टी की मांग है कि इमरान खान से उनके निजी डॉक्टर को मिलने दिया जाए और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाए। जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में इलाज की सुविधा देने की मांग भी की जा रही है।
इसके अलावा PTI ने इमरान खान की बहनों से मुलाकात की अनुमति, प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किए गए पार्टी कार्यकर्ताओं की रिहाई और इमरान की पत्नी बुशरा बीबी की चिकित्सा जांच से जुड़ी मांगें भी रखी हैं। पार्टी उनके मामलों की कानूनी प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होने की भी मांग कर रही है।
कहां से शुरू हुआ PTI का लॉन्ग मार्च?
PTI के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी ने रविवार रात करीब 12:46 बजे आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया। इसके बाद रविवार दोपहर करीब एक बजे लक्की मरवत के गांडी चौक से मार्च शुरू करने की योजना बताई गई।
मार्च में टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मरवत के समर्थकों के शामिल होने की बात कही गई है। इसके बाद कारवां करक के पास रात में रुकेगा और अगले दिन कोहाट की ओर बढ़ेगा।
6 अक्टूबर को कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकजई से आने वाले समर्थकों के भी मार्च में शामिल होने की योजना है। इसके बाद प्रदर्शनकारी पेशावर की ओर आगे बढ़ेंगे।
8 अक्टूबर तक क्या है मार्च का कार्यक्रम?
PTI के कार्यक्रम के मुताबिक 7 अक्टूबर को पेशावर के बुध बैर से कारवां आगे बढ़ेगा। इस दौरान पेशावर के अलग-अलग इलाकों से आने वाले लोग कोहाट रोड ब्रिज और मोटरवे टोल प्लाजा के पास मार्च में शामिल होंगे।
इसके बाद चरसद्दा इंटरचेंज के पास रात में पड़ाव की योजना है। 8 अक्टूबर को चरसद्दा और मोहम्मद इलाके के समर्थकों के भी इसमें शामिल होने की बात कही गई है। PTI ने खैबर पख्तूनख्वा के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को खैराबाद में जुटने का कार्यक्रम बनाया है। वहां रुकने के बाद इस्लामाबाद की ओर मार्च के अगले चरण को लेकर फैसला किया जाएगा।
इस्लामाबाद में सरकार ने बढ़ाई सुरक्षा
बातचीत विफल होने के बाद अब सरकार और PTI के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
सरकार की ओर से राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर शिपिंग कंटेनर लगाने और रास्तों को बंद करने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी है। सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है।
ऐसे में अब पाकिस्तान में राजनीतिक संकट एक नए दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक तरफ PTI इमरान खान से मुलाकात और अपनी अन्य मांगों को लेकर आंदोलन आगे बढ़ाने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर शहबाज सरकार राजधानी में प्रदर्शनकारियों की एंट्री रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि PTI का लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद तक पहुंच पाएगा या सरकार रास्ते में ही उसे रोकने की कोशिश करेगी।



