Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती दुनिया में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वास्तविक शक्ति का उद्देश्य दूसरों को सशक्त बनाना होना चाहिए। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार को ऐसे माध्यम बताया, जिनसे समाज के बड़े वर्ग को नए अवसर दिए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास का लाभ केवल कुछ लोगों या समूहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत का दृष्टिकोण ऐसी व्यवस्था तैयार करने का है, जिसमें अधिक से अधिक लोगों को आगे बढ़ने और अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर मिले।
‘Power to Empower’ के विचार पर दिया जोर
अपने संबोधन में नरेंद्र मोदी ने ‘Power to Empower’ यानी सशक्त बनाने की शक्ति की अवधारणा सामने रखी। उन्होंने कहा कि किसी देश या समाज की ताकत का आकलन केवल उसके संसाधनों, संपत्ति या तकनीकी क्षमता से नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, ज्ञान, तकनीक और आर्थिक संसाधन तभी सार्थक हैं, जब वे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं। इनका उपयोग अवसर पैदा करने, लोगों की क्षमता बढ़ाने और व्यापक विकास सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए।
भारत दुनिया के साथ मिलकर बढ़ना चाहता है
मोदी ने भारत के वैश्विक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की प्रगति दुनिया से अलग होकर नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर आगे बढ़ने में है। उन्होंने भारत की सोच को ‘दुनिया के साथ और दुनिया के लिए’ काम करने के विचार से जोड़ा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी उपलब्धियों का श्रेय लेने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ऐसी पहलों को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है जिनका लाभ दूसरे देशों और समाजों को भी मिल सके। उनके अनुसार, विकास की प्रक्रिया में दूसरों को पीछे छोड़ने के बजाय साथ लेकर चलना अधिक महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और CDRI का किया उल्लेख
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की ओर से शुरू की गई अंतरराष्ट्रीय पहलों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI) का उल्लेख करते हुए बताया कि साझा वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए विभिन्न देशों को एक मंच पर लाना जरूरी है।
इन पहलों का उद्देश्य ऊर्जा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। मोदी के संदेश का व्यापक आशय यह था कि किसी एक देश की क्षमता और अनुभव का इस्तेमाल अन्य देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
नियंत्रण से ज्यादा सशक्तिकरण जरूरी
प्रधानमंत्री ने सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन पर भी जोर दिया। उन्होंने ऐसी सोच को महत्वपूर्ण बताया, जिसमें दूसरों पर नियंत्रण स्थापित करने के बजाय उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में मदद दी जाए।
मोदी के अनुसार, केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। दूसरों की सफलता में योगदान देना और सामूहिक प्रगति का रास्ता तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह दृष्टिकोण वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने और विकास के लाभ को व्यापक बनाने में मदद कर सकता है।
पहली बार भारत में आयोजित हुआ फोरम
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का आयोजन पहली बार भारत में किया गया। प्रधानमंत्री ने इस आयोजन का स्वागत करते हुए फोरम के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग का उल्लेख किया और कहा कि भारत को इस कार्यक्रम के लिए चुनना सही समय पर लिया गया निर्णय है।
फोरम के आठवें संस्करण में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के 500 से अधिक प्रभावशाली नेताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई। इस वर्ष की थीम ‘A World in Play: Defining the New Levers of Power’ रखी गई, जिसके तहत बदलती भू-राजनीति, वैश्विक जोखिम, नए अवसरों और भविष्य की आर्थिक समृद्धि पर विचार-विमर्श किया गया।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री ने भारत को केवल निवेश के लिए आकर्षक बाजार के रूप में देखने के बजाय एक ऐसे विश्वसनीय साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया, जो वैश्विक भविष्य को आकार देने में योगदान दे सकता है।
उन्होंने भारत के विकास के लक्ष्य को व्यापक आर्थिक और सामाजिक बदलाव से जोड़ते हुए विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख किया। साथ ही, वैश्विक अर्थव्यवस्था में संतुलन, सहयोग और साझा विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
ज्ञान और संपदा का महत्व उनके इस्तेमाल से तय होता है
मोदी ने भारत की परंपराओं और शासन संबंधी विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि शक्ति, ज्ञान और संपत्ति का वास्तविक महत्व इस बात से तय होता है कि उनका उपयोग किस तरह किया जाता है। यदि इनका इस्तेमाल केवल सीमित हितों के लिए हो, तो इनकी उपयोगिता भी सीमित रह जाती है। लेकिन जब इन्हें समाज के व्यापक हित में लगाया जाता है, तो ये बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि भविष्य की दुनिया में तकनीकी क्षमता, आर्थिक संसाधन और ज्ञान के साथ जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होगी।
विकसित भारत के लक्ष्य के साथ वैश्विक सहयोग
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री की बातों ने भारत की विकास संबंधी प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने तकनीक और नवाचार को आम लोगों के लिए अवसर बढ़ाने का माध्यम बताया और साझा चुनौतियों से निपटने में देशों की भागीदारी पर जोर दिया।
भारत का यह दृष्टिकोण घरेलू विकास को वैश्विक सहयोग से जोड़ने की कोशिश को दर्शाता है। प्रधानमंत्री के संदेश के मुताबिक, किसी देश की प्रगति का व्यापक महत्व तब बढ़ता है, जब उससे दूसरे देशों और लोगों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलें।



