UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान चढ़ने लगा है। राजनीतिक दलों के बीच संभावित गठबंधनों और चुनावी रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। मुजफ्फरनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने साफ किया कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए ‘इंडिया अलायंस’ के साथ गठबंधन के सभी रास्ते अभी भी पूरी तरह खुले हुए हैं।
‘विपक्षी वोटों का बंटवारा रोकना प्राथमिकता’
गठबंधन की संभावनाओं पर बेबाकी से जवाब देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा, “लोकतंत्र में सभी राजनीतिक विकल्प हमेशा खुले रहते हैं। मैं इंडिया अलायंस के नेताओं से अपील कर रहा हूं कि मिलकर चुनाव लड़ते हैं। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनाव में विरोधी वोटों का बिखराव न हो।” उन्होंने कहा कि वोटर किसी पार्टी की जेब में नहीं होता; जनता के बीच जाकर कड़ी मेहनत करके ही अपनी जगह बनानी पड़ती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े, मुस्लिम, किसान और मजदूर वर्गों का सामाजिक तालमेल एक अभेद्य ताकत बनेगा।
समाजवादी पार्टी पर कसा तंज
जब चंद्रशेखर आजाद से पूछा गया कि क्या वे समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने सपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। आजाद ने कहा, “मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी अकेले चुनाव हारना तो पसंद कर सकती है, लेकिन अन्य दलों को साथ मिलाकर भाजपा को हराना पसंद नहीं करेगी। वे ऐसा क्यों सोचते हैं, इसका जवाब तो जनता को वही दे सकते हैं।”
गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग
किसानों और आम जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए नगीना सांसद ने योगी और मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के कार्यकाल में सरकार ने गन्ने के समर्थन मूल्य में कितनी बढ़ोतरी की है? चंद्रशेखर आजाद ने तर्क दिया, “जब खुले बाजार में चीनी ₹60 प्रति किलो बिक सकती है, तो किसानों के गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल क्यों नहीं हो सकता? ऐसा करने से सरकार को कौन रोक रहा है?” इसके अलावा उन्होंने सरकारी स्कूलों, मुफ्त शिक्षा, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और युवाओं को रोजगार देने पर सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया।
बैलेट पेपर से चुनाव और पंचायत चुनाव पर हमला
चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बात करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने मांग की कि आगामी चुनाव ईवीएम (EVM) की बजाय बैलेट पेपर (Ballot Paper) से कराए जाने चाहिए, क्योंकि जनता का यही भरोसा है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार हार के डर से बौखलाई हुई है और चुनाव कराने से भाग रही है।



