Electric Diya: दिवाली के मौके पर बाजार में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ कई तरह के इलेक्ट्रिक दीये भी उपलब्ध हैं। इनमें कुछ ऐसे दीये हैं, जिन्हें जलाने के लिए न तेल डालना पड़ता है और न ही बाती की जरूरत होती है। हैरानी की बात यह है कि इन दीयों में सिर्फ थोड़ा-सा पानी डालने पर ही रोशनी जल उठती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बिना बिजली के कनेक्शन और स्विच के ये दीये कैसे काम करते हैं?
दरअसल, इन दीयों के भीतर एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, बैटरी, LED और धातु के दो संपर्क बिंदु लगे होते हैं। पानी इन संपर्क बिंदुओं के बीच विद्युत प्रवाह का रास्ता बनाने में मदद करता है। जैसे ही सर्किट सक्रिय होता है, LED जलने लगती है और दीया रोशनी देने लगता है।
इलेक्ट्रिक दीये के अंदर क्या होता है?
पानी से जलने वाले इलेक्ट्रिक दीये का आकार भले ही पारंपरिक मिट्टी के दीये जैसा हो, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह अलग होती है। इसके अंदर कुछ छोटे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे लगाए जाते हैं, जो पानी के संपर्क में आने पर काम करना शुरू कर देते हैं।
आमतौर पर ऐसे दीयों में ये हिस्से होते हैं:
- LED लाइट: रोशनी पैदा करने का काम करती है।
- छोटी बैटरी: LED और सर्किट को बिजली देती है।
- धातु के दो इलेक्ट्रोड: पानी के संपर्क में आने पर सर्किट पूरा करने में मदद करते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक सर्किट: बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है।
इन सभी हिस्सों की मदद से दीया बिना किसी बाहरी बिजली कनेक्शन के रोशनी दे सकता है।
पानी डालते ही कैसे पूरा होता है सर्किट?
इस तकनीक के पीछे बिजली के प्रवाह का सामान्य सिद्धांत काम करता है। जब दीये में पानी नहीं होता, तब उसके दोनों धातु के संपर्क बिंदुओं के बीच विद्युत कनेक्शन नहीं बन पाता। ऐसे में सर्किट बंद रहता है और LED नहीं जलती।
जैसे ही दीये में पानी डाला जाता है, पानी दोनों इलेक्ट्रोड के संपर्क में आ जाता है। सामान्य पानी में कुछ घुले हुए खनिज और आयन मौजूद होते हैं, जो उसे बिजली का संचालन करने में मदद करते हैं। पानी के जरिए दोनों संपर्क बिंदुओं के बीच रास्ता बनता है और सर्किट सक्रिय हो जाता है।
इसके बाद दीये में लगी बैटरी से LED तक बिजली पहुंचती है और रोशनी जलने लगती है। यानी पानी खुद बिजली पैदा नहीं करता, बल्कि बैटरी से चलने वाले सर्किट को सक्रिय करने में मदद करता है।
क्या हर तरह के पानी से जल जाएगा दीया?
इन दीयों को चलाने में पानी की विद्युत चालकता अहम भूमिका निभाती है। सामान्य नल के पानी में घुले खनिज और आयन मौजूद होते हैं, इसलिए वह बिजली का संचालन कर सकता है।
वहीं, डिस्टिल्ड या बहुत कम खनिज वाला RO पानी अपेक्षाकृत कम बिजली का संचालन कर सकता है। ऐसे में कुछ मॉडलों में दीया ठीक से न जले या उसकी रोशनी सक्रिय होने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, इसका परिणाम दीये में इस्तेमाल किए गए सर्किट और सेंसर की बनावट पर भी निर्भर करता है।
इसलिए दीये के साथ दिए गए निर्माता के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। अपनी तरफ से पानी में नमक या कोई दूसरा पदार्थ मिलाने से बचना चाहिए, जब तक कि निर्माता इसकी सलाह न दे।
कितनी देर तक जल सकते हैं इलेक्ट्रिक दीये?
पानी से जलने वाले इलेक्ट्रिक दीयों में इस्तेमाल की गई बैटरी के आधार पर उनका बैकअप अलग-अलग हो सकता है। कुछ उत्पादों में 40 से 50 घंटे तक रोशनी देने का दावा किया जाता है, लेकिन यह हर मॉडल के लिए लागू नहीं होता।
दीये के जलने की अवधि बैटरी की क्षमता, LED की बिजली खपत, सर्किट की बनावट और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करती है। इसलिए खरीदारी करते समय पैकेजिंग पर दी गई बैटरी और बैकअप संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
दीये को बंद कैसे किया जाता है?
पानी से जलने वाले इलेक्ट्रिक दीये को बंद करना भी आसान होता है। पानी हटाने या इलेक्ट्रोड को सूखा रखने पर सर्किट का संपर्क टूट जाता है और LED बंद हो जाती है।
हालांकि, दीये को इस्तेमाल करने के बाद उसके इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों और बैटरी को पानी से सुरक्षित रखना चाहिए। यदि उत्पाद को पानी में डुबोने की अनुमति नहीं है, तो ऐसा बिल्कुल न करें। लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर निर्माता के निर्देशों के अनुसार उसे साफ और सूखी जगह पर रखें।
दिवाली पर क्यों बढ़ रही है ऐसे दीयों की मांग?
पारंपरिक दीयों के मुकाबले इलेक्ट्रिक दीयों को इस्तेमाल करना आसान माना जाता है। इनमें तेल और बाती की जरूरत नहीं पड़ती, जबकि पानी डालकर रोशनी चालू करने का तरीका लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है।
इनका इस्तेमाल घर की सजावट, पूजा स्थल और अन्य स्थानों पर किया जा सकता है। हालांकि, इन्हें खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, बैटरी, सुरक्षा और निर्माता के निर्देशों की जानकारी लेना जरूरी है।
इलेक्ट्रिक दीयों के पीछे है छोटा-सा विज्ञान
पानी से जलने वाले इलेक्ट्रिक दीये किसी जादू से नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और पानी की चालकता के सिद्धांत से काम करते हैं। पानी दोनों इलेक्ट्रोड के बीच संपर्क बनाता है और बैटरी से मिलने वाली ऊर्जा LED को रोशन कर देती है।
इस तरह एक छोटी-सी तकनीक दिवाली की सजावट को नया रूप देती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि रोशनी के लिए ऊर्जा बैटरी से आती है, पानी से नहीं।



