Ram Mandir Donation Case: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 2 नवंबर को सुनवाई के बाद संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया। अदालत को बताया गया कि विशेष जांच दल (SIT) इस मामले में अयोध्या के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपपत्र दाखिल कर चुका है।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के रूप में ट्रायल कोर्ट की सहायता कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं का निपटारा करने का मतलब आरोपों पर कोई अंतिम राय देना नहीं है।
चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की SIT जांच में जानकारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को जांच से जुड़ी बातें बताईं।
उन्होंने कहा कि SIT की जांच में मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। मेहता के मुताबिक, कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर इस रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया, जबकि अन्य ने हेराफेरी की रकम बैंक खातों में जमा कराई।
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की ओर से दी गई जानकारी को रिकॉर्ड पर लिया। हालांकि, इन आरोपों की सच्चाई और आरोपियों की भूमिका का निर्धारण निचली अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
याचिकाकर्ता मुकदमे में ट्रायल कोर्ट की कर सकेंगे सहायता
शीर्ष अदालत ने कहा कि SIT द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद मामले की सुनवाई अब निचली अदालत में आगे बढ़ेगी। ऐसे में याचिकाकर्ताओं के पास मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता के तौर पर अदालत की सहायता करने का विकल्प रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इसका अर्थ है कि अदालत ने न तो आरोपों को सही ठहराया और न ही उन्हें खारिज किया। मामले में आगे का फैसला साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ट्रायल कोर्ट को करना होगा।
सितंबर में SIT ने चार्जशीट दाखिल करने की दी थी जानकारी
इस मामले की सुनवाई के दौरान 21 सितंबर को SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह 25 सितंबर तक या उससे पहले अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी। अब 2 नवंबर की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को जानकारी दी कि आरोपपत्र अयोध्या के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दाखिल किया जा चुका है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच से जुड़े तथ्यों और आरोपियों की भूमिका पर निचली अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
राम मंदिर ट्रस्ट में भी हुए प्रशासनिक बदलाव
चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए गए। ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाया और वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को इसकी जिम्मेदारी सौंपी।
खबर के अनुसार, 27 जून को ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट में किए गए इन बदलावों का उल्लेख भी इस मामले से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में सामने आया है।
राम मंदिर की जमीन को लेकर नई याचिका पर सुनवाई से इनकार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग याचिका पर विचार करने से भी इनकार कर दिया। इसमें मांग की गई थी कि अदालत यह तय करे कि राम मंदिर का निर्माण उसी जमीन पर हुआ है या नहीं, जिसे मुख्य अयोध्या भूमि विवाद मामले में मंदिर निर्माण के लिए निर्धारित किया गया था।
शीर्ष अदालत ने इस नई याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। यह मामला चढ़ावे की कथित हेराफेरी से जुड़ी याचिकाओं से अलग था।
अब निचली अदालत में होगी आगे की सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावे की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में SIT की चार्जशीट दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। याचिकाकर्ताओं को मुकदमे के दौरान ट्रायल कोर्ट की सहायता करने का विकल्प दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अब निचली अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर मामले की आगे की सुनवाई होगी।



