Shaktimaan: 29 साल बाद भी कायम है जादू, 400 से ज्यादा एपिसोड ने बनाया टीवी का यादगार सुपरहीरो

13 सितंबर 1997 को दूरदर्शन पर शुरू हुआ ‘शक्तिमान’ करीब आठ साल तक चला और इसके 400 से ज्यादा एपिसोड प्रसारित हुए।

Shaktimaan: 90 के दशक में रविवार का दिन बच्चों के लिए खास हुआ करता था। टीवी पर जैसे ही ‘शक्तिमान’ का नाम आता, बच्चों की नजरें स्क्रीन पर टिक जाती थीं। उस दौर में न सोशल मीडिया था और न ही आज की तरह सुपरहीरो फिल्मों और वेब सीरीज की भरमार। ऐसे समय में मुकेश खन्ना का ‘शक्तिमान’ भारतीय बच्चों के लिए सुपरहीरो की ऐसी पहचान बना, जिसे आज 29 साल बाद भी लोग याद करते हैं।

13 सितंबर 1997 को दूरदर्शन पर प्रसारित हुए ‘शक्तिमान’ के पहले एपिसोड ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक अलग जगह बनाई। करीब आठ वर्षों तक चले इस शो के 400 से ज्यादा एपिसोड प्रसारित हुए। 27 मार्च 2005 को इसका आखिरी एपिसोड आया, लेकिन शो खत्म होने के बाद भी इसका किरदार दर्शकों की यादों से कभी बाहर नहीं हुआ।

भारत को मिला अपना देसी सुपरहीरो

उस दौर में बच्चों के बीच सुपरमैन और दूसरे विदेशी सुपरहीरो के किरदार लोकप्रिय थे। ऐसे समय में ‘शक्तिमान’ ने भारतीय दर्शकों को अपना सुपरहीरो दिया। शो की कहानी में शक्तिमान को मानवता की रक्षा के लिए चुना गया एक ऐसा किरदार दिखाया गया, जिसने साधना, ध्यान और पंचतत्वों पर नियंत्रण के जरिए असाधारण शक्तियां हासिल की थीं।

यही भारतीयता इस किरदार की सबसे बड़ी खासियत बनी। शक्तिमान सिर्फ बुराई से लड़ने वाला सुपरहीरो नहीं था, बल्कि उसके जरिए बच्चों को ईमानदारी, अनुशासन, मानवता और अच्छे व्यवहार का संदेश भी दिया जाता था।

मुकेश खन्ना ने खुद गढ़ी शक्तिमान की पहचान

‘शक्तिमान’ के किरदार और शो की कल्पना का श्रेय मुकेश खन्ना को दिया जाता है। उस समय तक वह ‘महाभारत’ में भीष्म पितामह की भूमिका निभाकर घर-घर में लोकप्रिय हो चुके थे। लेकिन वह अपने करियर में एक अलग तरह की पहचान बनाना चाहते थे।

मुकेश खन्ना ने बच्चों के लिए ऐसे भारतीय सुपरहीरो की कल्पना की, जो मनोरंजन के साथ उन्हें जीवन से जुड़ी अच्छी बातें भी सिखा सके। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने प्रोडक्शन बैनर भीष्म इंटरनेशनल के तहत ‘शक्तिमान’ का निर्माण किया। शो का निर्देशन दिनकर जानी ने किया था।

शक्तिमान के साथ गंगाधर भी बने यादगार

इस शो की खासियत सिर्फ शक्तिमान का किरदार नहीं था। मुकेश खन्ना ने इसमें डबल रोल निभाया। एक तरफ वह शक्तिमान के गंभीर और प्रभावशाली किरदार में नजर आए, तो दूसरी तरफ गंगाधर के रूप में उनकी कॉमेडी ने दर्शकों को खूब हंसाया।

गंगाधर का चश्मा, अलग अंदाज और भोला-भाला व्यवहार शक्तिमान की गंभीर छवि से बिल्कुल अलग था। यही विरोधाभास शो की कहानी को और मनोरंजक बनाता था।

इसके अलावा सुरेंद्र पाल का तमराज किलविश, वैष्णवी महंत का गीत विश्वास, टॉम ऑल्टर का महागुरु और ललित परिमू का डॉ. जैकाल जैसे किरदार भी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए।

आठ साल तक चला शो, 400 से ज्यादा एपिसोड

‘शक्तिमान’ का पहला एपिसोड 13 सितंबर 1997 को प्रसारित हुआ था। करीब आठ साल तक यह शो दर्शकों का मनोरंजन करता रहा और इसका अंतिम एपिसोड 27 मार्च 2005 को टेलीकास्ट हुआ।

इस दौरान इसके 400 से ज्यादा एपिसोड प्रसारित हुए। 90 के दशक में इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शो के प्रसारण के समय बच्चों की दिनचर्या तक बदल जाती थी। कई बच्चे खेलना और दूसरे काम जल्दी खत्म करके टीवी के सामने बैठ जाते थे।

उस समय सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नहीं थे, इसलिए टीवी पर किसी कार्यक्रम की लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण यही था कि उसके प्रसारण के समय घरों और मोहल्लों में कितनी खामोशी छा जाती थी।

बच्चों ने की शक्तिमान बनने की कोशिश, उठे सवाल

शो की लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि कई बच्चों ने शक्तिमान के स्टंट और उड़ने की नकल करने की कोशिश की। उस दौर में बच्चों के छत से कूदने या सुपरहीरो की तरह करतब करने की खबरों के बाद शो को लेकर बहस भी हुई।

हालांकि, मुकेश खन्ना ने कई मौकों पर यह स्पष्ट किया कि ‘शक्तिमान’ के बंद होने की मुख्य वजह बच्चों द्वारा स्टंट की नकल करना नहीं थी। शो के बंद होने के पीछे आर्थिक और प्रसारण से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख कारण बताया गया।

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29 साल बाद भी क्यों याद किया जाता है शक्तिमान?

आज बच्चों के पास सुपरहीरो के कई विकल्प हैं। हॉलीवुड की बड़ी फिल्में, एनिमेशन, वेब सीरीज और डिजिटल कंटेंट लगातार नए किरदार पेश करते हैं। इसके बावजूद ‘शक्तिमान’ की लोकप्रियता एक अलग तरह की है।

इसकी वजह सिर्फ पुरानी यादें नहीं हैं। शक्तिमान एक ऐसे दौर का हिस्सा था, जब टीवी मनोरंजन के साथ सीखने का भी बड़ा माध्यम था। इस किरदार ने भारतीय मूल्यों, नैतिकता और जिम्मेदारी को सुपरहीरो की कहानी के साथ जोड़ दिया था।

यही कारण है कि 29 साल बाद भी मुकेश खन्ना का शक्तिमान 90 के दशक की पीढ़ी के लिए सिर्फ एक टीवी किरदार नहीं, बल्कि बचपन की यादों का हिस्सा है। 400 से ज्यादा एपिसोड और करीब आठ साल के सफर ने इस शो को भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार कार्यक्रमों में शामिल कर दिया।

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