सो रहे यात्रियों में मची भगदड़
बताया जा रहा है कि हादसे के समय अधिकांश यात्री नींद में थे। अचानक बस के अंदर धुआं भरने लगा, जिसके बाद यात्रियों में हड़कंप मच गया। लोग अपनी सीटों से उठकर बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे। कुछ यात्रियों ने दूसरों को जगाया, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
एक यात्री ने बताया कि जब उन्हें आग लगने की जानकारी मिली तो बस के अंदर सांस लेना मुश्किल हो चुका था। धुएं के कारण लोगों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और हर कोई जान बचाने की कोशिश कर रहा था।
जान बचाने के लिए छोड़ना पड़ा सामान
हादसे में बची एक महिला यात्री ने बताया कि उन्हें अपना बैग, कपड़े और अन्य जरूरी सामान बस में ही छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय सिर्फ जान बचाना सबसे जरूरी था। कई यात्री बिना जूते-चप्पल पहने ही बस से बाहर निकल आए।
महिला के मुताबिक बस के अंदर चीख-पुकार मची हुई थी और बाहर निकलने के दौरान धक्का-मुक्की भी हुई। कई लोग घबराहट के कारण गिर पड़े, जबकि कुछ यात्रियों को दूसरों ने खींचकर बाहर निकाला।
कुछ मिनटों में जल गई पूरी बस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि राहत पाने का समय ही नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में पूरी बस आग की लपटों से घिर गई। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और राहगीरों ने भी बचाव कार्य में मदद की।
मौके पर पहुंची राहत टीमें
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, जबकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन मृतकों की पहचान और हादसे के कारणों की जांच में जुटा हुआ है।
आग लगने की वजह तलाश रही जांच टीम
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बस में आग किस कारण लगी। तकनीकी खराबी और शॉर्ट सर्किट समेत कई संभावनाओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी।
यह हादसा लंबी दूरी की बसों में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर गया है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है।