Rahul Gandhi Press Conference: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी देते हुए कहा कि ”संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है। न्याय जरूर होगा।” राहुल गांधी की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ फैसलों पर दर्ज की गई आपत्तियों से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि आयोग के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
राहुल गांधी ने पोस्ट कर दी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी
राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ”संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है। न्याय जरूर होगा।” इसके साथ उन्होंने बताया कि वह शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।
उनकी यह घोषणा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही बहस के बीच आई है। पिछले कुछ समय से राहुल गांधी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
अब उनकी प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित आपत्तियों को लेकर उनके रुख पर नजर रहेगी।
क्या है चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों का मामला?
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ये आपत्तियां SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, अपीलों तथा मतदाता डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों से संबंधित थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में इस बात पर सवाल उठाया कि संबंधित फैसलों की जानकारी या मंजूरी उन्हें पहले नहीं दी गई थी। हालांकि, इन रिपोर्टों को चुनाव आयोग ने अपने अंतिम निर्णयों में मतभेद के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।
Form-6 में बदलाव को लेकर भी उठा सवाल
विवाद का एक अहम हिस्सा नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलाव से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म में SIR से संबंधित एक सवाल जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की ओर से आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। आपत्ति में कथित तौर पर यह सवाल उठाया गया कि इस तरह के बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन की जरूरत हो सकती है।
हालांकि, इस पूरे मामले में चुनाव आयोग का पक्ष अलग है और उसने अपने कामकाज में किसी अंतिम स्तर के मतभेद से इनकार किया है।
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर क्या कहा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने बुधवार को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह संविधान के तहत काम करने वाली बहु-सदस्यीय संस्था है। आयोग के अनुसार, किसी भी संस्थान में सदस्यों के बीच टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक विचार-विमर्श सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और सभी औपचारिक निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत कानून और अपने निर्देशों के अनुसार काम करने की बात कही है।
यानी एक तरफ रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से विभिन्न मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि इन टिप्पणियों को अंतिम फैसलों पर असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।



