Supreme Court: तेलंगाना के पूर्व विधायक दानम नागेंद्र को SC से राहत नहीं, अयोग्यता का फैसला बरकरार

Supreme Court: खैराताबाद सीट से चुने गए दानम नागेंद्र को दलबदल मामले में बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार।

Supreme Court: तेलंगाना की राजनीति से जुड़े चर्चित दलबदल विवाद में पूर्व BRS विधायक दानम नागेंद्र को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दानम नागेंद्र की अयोग्यता से जुड़ा हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी बना रहेगा। इससे खैराताबाद विधानसभा सीट को लेकर आगे की प्रक्रिया का रास्ता भी साफ हो गया है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

दानम नागेंद्र ने 2023 के विधानसभा चुनाव में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर गए।

उनके इस कदम को लेकर BRS नेताओं ने दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की थी। मामला विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचा, लेकिन याचिकाएं खारिज कर दी गईं। इसके बाद विवाद अदालत पहुंच गया।

हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

तेलंगाना हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना था कि विधायक रहते हुए किसी दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना दलबदल की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को रद्द कर दिया था और नागेंद्र की सदस्यता समाप्त मानी थी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद खैराताबाद सीट को रिक्त मानने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

दानम नागेंद्र ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी दलीलों से सहमति नहीं जताई और याचिका खारिज कर दी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को राजनीतिक दल बदलने की प्रवृत्ति से जोड़ते हुए टिप्पणी भी की। कोर्ट का मानना था कि हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने का पर्याप्त कारण नहीं है।

फैसले के बाद दानम नागेंद्र की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद दानम नागेंद्र ने कहा कि वे अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में जब भी चुनाव होंगे, वे जनता के बीच जाकर फिर समर्थन हासिल करेंगे।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब हाई कोर्ट का आदेश लागू रहेगा। ऐसे में खैराताबाद विधानसभा सीट को लेकर चुनाव आयोग और विधानसभा सचिवालय आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करेंगे।

यह मामला दलबदल विरोधी कानून और राजनीतिक दल बदलने से जुड़े नियमों पर एक अहम मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

Related Articles