लखनऊ । उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि दूसरे राज्यों की तरह प्रदेश में भी किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली आसानी से दी जा सकती है। इस संबंध में परिषद द्वारा राजनीतिक पार्टियों को सुझाव दिए जा सकते हैं। वर्मा का कहना है कि प्रदेश में 13,16,399 ट्यूबवेल के कनेक्शन हैं जिनका लोड 79,41,706 किलोवाट है। चालू वित्तीय वर्ष में ट्यूबवेल कनेक्शन पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा कुल 14,006 मिलियन यूनिट बिजली की जरूरत बताई गई है जिसकी लागत लगभग 1845 करोड़ रुपये है। वर्मा का कहना है कि किसानों को मुफ्त बिजली के लिए पहला उपाय तो यह कि सरकार दो हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दे दे। महंगी बिजली खरीद पर अंकुश लगाकर और उत्पादन यूनिटों के लेट पेमेंट के छह फीसद घटने से होने वाले फायदे से भी किसानों को आसानी से मुफ्त में बिजली दी जा सकती है। परिषद अध्यक्ष के मुताबिक आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना जैसे राज्यों में किसानों की बिजली मुफ्त है। हरियाणा और पुडुचेरी में किसानों से टोकन 10 पैसे प्रति यूनिट ही लिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में किसानों से ग्रामीण क्षेत्र में अनमीटर्ड कनेक्शन होने पर 170 रुपये प्रति एचपी, मीटर होने पर 70 रुपये प्रति एचपी व एनर्जी चार्ज का दो रुपये यूनिट ग्रामीण क्षेत्र में जबकि शहरी क्षेत्र के कनेक्शन होने पर 130 रुपये प्रति एचपी व एनर्जी चार्ज 6 रुपये प्रति यूनिट है।
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