प्रयागराज। कुछ हस्तियों के आने का समय होता है जाने का नहीं। वह हमेशा हम सबके साथ रहती हैं। इन्हीं में एक स्वर कोकिला और भारत रत्न लता मंगेशकर हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में गोमंतक मराठा समाज परिवार के पंडित दीनानाथ मंगेशकर के यहां 28 सितंबर 1929 को हुआ। उनका शरीर अब हम सबके बीच नहीं है। लेकिन उनके सुर और संगीत हमेशा हमारे साथ रहेंगे। खासकर संगीत के विद्यार्थियों के लिए वह आदर्श, मानक और गुरू के रूप में स्थापित रहेंगी। इस दिशा में इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जल्द ही यहां पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम शुरू होगा। संगीत के विद्यार्थी उनके जीवन और गायन के तकनीकी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर सकेंगे।नई शिक्षा नीति के तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। यह पाठ्यक्रम स्नातक और परास्नातक को मिलाकर तैयार किया गया है। इसके बाद संगीत के विद्यार्थी सीधे डाक्टरेट की उपाधि हासिल कर सकेंगे। इस पाठ्यक्रम में स्वर कोकिला लता मंगेशकर को भी शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय के निर्देश पर तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पंडित प्रेम कुमार मलिक ने प्रस्ताव तैयार कर विभागस्तरीय कमेटी के पास भेजा।कमेटी ने प्रस्ताव को हरी झंडी भी दे दी। अब यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय स्तर पर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। वहां से कमेटी विभाग को फिर से संपादन के लिए भेजेगी। ताकि, यदि कोई त्रुटि हो तो संशोधन किया जा सके। इसके बाद बोर्ड आफ गवर्निंग फिर एकेडमिक काउंसिल में यह प्रस्ताव रखा जाएगा। यहां से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव कार्य परिषद में रखा जाएगा।वहां सर्वसम्मति से मुहर लगने के बाद लता मंगेशकर को पाठ्यक्रम में शामिल करते हुए शैक्षणिक सत्र 2022-23 से संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग के छात्र-छात्राओं को उनके बारे में पढ़ाया जाने लगेगा। फिलहाल विभाग के शिक्षक लता मंगेशकर पर पाठ्यक्रम डिजाइन को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
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