लखनऊ। गोमती नगर में दलालों के काकस के आगे लखनऊ विकास प्राधिकरण की टीम लाख कोशिशों के बाद भी कुछ नहीं कर पा रही है। इस बार दलालों ने एक ईडब्लयूएस मकान के जिल्द संख्या का उपयोग विकल्प खंड के भूखंड को बाहर ही बाहर बेचने में किया। लखनऊ विकास प्राधिकरण (लविप्रा) के सचिव पवन कुमार गंगवार के पास मामला आया है। मामले की जांच सचिव ने ओएसडी अमित राठौर को सौंपी है।प्रारंभिक जांच में लविप्रा ने पाया कि आवंटी टोवर सरफिस के भवन संख्या 1/896 विशाल खंड में है, जो एक ईडब्ल्यूएस मकान है। दलालों के काकस ने टोवर की रजिस्ट्री में इस्तेमाल हुए जिल्द संख्या का उपयोग भूखंड संख्या 3/362 विकल्प खंड तीन की रजिस्ट्री में कर डाला। शिकायतकर्ता की जांच में यह तथ्य सामने आए। यह रजिस्ट्री बाहर ही बाहर हो गई। यह भूखंड लविप्रा का है या अन्य किसी आवंटी का, इसकी जांच अब की जा रही है। भूखंड की कीमत करीब दो करोड़ के आसपास है।लविप्रा सचिव पवन कुमार गंगवार ने बताया कि विकल्प खंड तीन स्थित भूखंड संख्या 3/362 जो 200 वर्ग मीटर का है। इसकी रजिस्ट्री चौक के पाटा नाला निवासी रेहान खान ने लविप्रा का मूल आवंटी बनकर पंकज कुमार तिवारी को कर दी। यह सारा कारनामा 20 जून 2021 में किया गया। यह मामला उस वक्त खुला जब कुशीनगर निवासी पंकज द्वारा रजिस्ट्री की पुष्टि करने के लिए लविप्रा से सत्यापित प्रति मांगी। लविप्रा के वकील द्वारा रजिस्ट्री आफिस में मुआयना करने पर ज्ञात हुआ कि संबंधित भूखंड नंबर का कम्प्यूटर द्वारा अभिलेखों का परीक्षण किया गया और रिकार्ड के अनुसार पंकज कुमार तिवारी पुत्र पशुपति नाथ तिवारी निवासी साडीखुर्द सिधुआ बागर कुशीनगर पाया गया।
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