रायबरेली। अधिवक्ता नबी अहमद हत्याकांड में बर्खास्त दारोगा शैलेंद्र सिंह दोषी पाया गया है। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने उसकी सजा का फैसला सुरक्षित रखा है। शुक्रवार को हत्या के अभियोग में उसे सजा सुनाई जाएगी। अभियुक्त शैलेंद्र रायबरेली जेल में पिछले सात साल से बंद हैं। इलाहाबाद कचेहरी में सीजेएम कोर्ट के सामने 2015 में 11 मार्च को अधिवक्ता नबी अहमद के ऊपर दारोगा शैलेंद्र सिंह ने फायर झोंक दिया था। गोली लगने के कारण वकील की मौत हो गई थी। नबी अहमद के पिता शाहिद सिद्दीकी ने दारोगा शैलेंद्र सिंह और राशिद सिद्दीकी पर कर्नलगंज थाने में हत्या का केस दर्ज कराया था। इस वारदात के बाद दाराेगा शैलेंद्र को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इलाहाबाद की कचेहरी में वकीलों का भारी विरोध होने के कारण हाईकोर्ट के विशेष आदेश पर केस जून 2015 में रायबरेली कचेहरी स्थानांतरित कर दिया। करीब सात वर्षों से जनपद एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में इस केस की सुनवाई चल रही है। गुरुवार को जिला जज अब्दुल शाहिद ने शैलेंद्र सिंह को नबी अहमद की हत्या में दोषी पाते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 302 के मामले में अभियुक्त को कौन सा दंड सुनाया जाता है अधिवक्ता के पिता शाहिद सिद्दीकी ने बताया था कि जुलाई 2014 में उनके बेटे नबी ने राशिद सिद्दीकी के खिलाफ मारपीट का केस दर्ज कराया था। उक्त प्रकरण में राशिद ने दारोगा शैलेंद्र से मिलकर फाइनल रिपोर्ट लगवा दी थी। 11 मार्च को वह इलाहाबाद कचेहरी अपने बेटे नबी अहमद से मिलने आए थे। उन्होंने देखा कि इसी प्रकरण को लेकर नबी अहमद दारोगा शैलेंद्र से बात कर रहा था कि तभी दारोगा ने उनके बेटे को गोली मार दी और हवाई फायरिंग करते हुए भाग निकला।
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