Pakistan Army Crisis: पाकिस्तान अपनी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का दावा करता रहा है, लेकिन जमीनी आंकड़े बताते हैं कि देश के भीतर हिंसा का दबाव कम नहीं हुआ है। खासतौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बल लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं।
South Asia Terrorism Portal (SATP) के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में पाकिस्तान में 532 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 754 और 2025 में 1,229 हो गई। यानी दो साल में सुरक्षा बलों की मौतों में करीब 131 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
2026 में भी नहीं थमा सुरक्षा संकट
SATP के 5 सितंबर तक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में पाकिस्तान में 965 सुरक्षा बलों के जवान मारे जा चुके हैं। यह आंकड़ा अभी पूरे साल का नहीं है और SATP के अनुसार आंकड़े provisional हैं।
अगर 2025 के पूरे साल के 1,229 मौतों से तुलना करें तो 2026 में साल खत्म होने से काफी पहले ही सुरक्षा बलों की मौतों का आंकड़ा काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
हाल के दिनों में भी पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा जारी रही है। सितंबर की शुरुआत में उत्तर वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने टीटीपी से जुड़े 15 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया था। इसके बाद बलूचिस्तान में कई सैन्य अभियानों में 48 आतंकियों के मारे जाने की जानकारी पाकिस्तान की सेना ने दी।
बलूचिस्तान बना सबसे बड़ा चुनौती वाला इलाका
SATP के राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक 2026 में अब तक बलूचिस्तान में 660 सुरक्षा बलों की मौत दर्ज की गई है, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में यह संख्या 281 है। यानी दोनों इलाके पाकिस्तान के सुरक्षा संकट के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं।
2025 में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही थी। उस साल बलूचिस्तान में 751 और खैबर पख्तूनख्वा में 455 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर यह संख्या 1,206 थी, जो पाकिस्तान में उस साल सुरक्षा बलों की कुल 1,229 मौतों का लगभग पूरा हिस्सा थी।
बलूचिस्तान में बलूच अलगाववादी संगठनों, खासकर BLA से जुड़ी हिंसा, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में TTP से जुड़ी गतिविधियां पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
BLA और TTP दोनों से दबाव
आंकड़ों के अनुसार सुरक्षा बलों को BLA और TTP दोनों से चुनौती मिल रही है। 2025 में BLA से जुड़े संघर्षों में 339 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत दर्ज की गई थी, जबकि TTP से जुड़े मामलों में यह संख्या 174 थी। 2026 में 5 सितंबर तक BLA से जुड़े संघर्षों में 136 और TTP से जुड़े मामलों में 87 सुरक्षा बलों की मौत दर्ज की गई है।
हालांकि, हर सुरक्षा बल की मौत को सीधे किसी एक संगठन से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि SATP के आंकड़ों में कुछ घटनाएं अप्रत्यक्ष या अन्य श्रेणियों में भी दर्ज होती हैं।
आसिम मुनीर के सामने बढ़ी सुरक्षा चुनौती
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के सामने यह स्थिति बड़ी चुनौती है। एक तरफ पाकिस्तान क्षेत्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक भूमिका दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर सुरक्षा बलों को लगातार हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।
SATP के आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि पाकिस्तान में सुरक्षा बलों की मौतों का स्तर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। हालांकि इसे सीधे तौर पर “सेना में बगावत” कहना सावधानी मांगता है। उपलब्ध आंकड़े मुख्य रूप से आतंकी और सशस्त्र संघर्षों में सुरक्षा बलों की मौतों को दर्शाते हैं, न कि सैन्य संस्थान के भीतर किसी संगठित विद्रोह को।



