Supreme Court: चार साल पुराने एक राजनीतिक बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर हलचल देखने को मिली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मानहानि मामले में शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत से जल्द सुनवाई की मांग की है। इसी दौरान कोर्ट में हुई टिप्पणी ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया।
सुनवाई से पहले ही उठा लिस्टिंग का मुद्दा
मामले की मेंशनिंग के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत के सामने कहा कि लंबे समय से केस सूचीबद्ध नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सुनवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तुरंत स्पष्ट किया कि अदालत किसी व्यक्ति की राजनीतिक हैसियत देखकर फैसले नहीं करती। उन्होंने कहा कि नियमानुसार आवेदन दाखिल किया जाए, मामले पर विचार किया जाएगा।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद दिसंबर 2022 में दिए गए राहुल गांधी के एक बयान से जुड़ा है। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने भारत-चीन सीमा तनाव का जिक्र करते हुए भारतीय सैनिकों को लेकर टिप्पणी की थी।
इस बयान के बाद पूर्व BRO अधिकारी उदय शंकर श्रीवास्तव ने आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप था कि बयान से भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
हाई कोर्ट से नहीं मिली थी राहत
राहुल गांधी ने इस शिकायत को रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी भी संवैधानिक सीमाएं हैं। किसी भी संस्था की गरिमा से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी जता चुका है सख्ती
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जे के दावे का आधार क्या है और उसके समर्थन में कौन से तथ्य मौजूद हैं।
हालांकि, उसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी।
अब आगे क्या?
शिकायतकर्ता पक्ष अब औपचारिक आवेदन दाखिल करेगा। इसके बाद सुप्रीम Court यह तय करेगा कि मामले की अगली सुनवाई कब और किस बेंच के सामने होगी। राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों में इस मामले पर नजर बनी हुई है।
written by Siddhi Srivastava



