Nishikant Dubey: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार की पाकिस्तान नीति को लेकर कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 16 सितंबर 2006 को हवाना में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच हुई बैठक का हवाला देते हुए दावा किया कि उस समय सैन्य कार्रवाई के बजाय पाकिस्तान के साथ बातचीत को प्राथमिकता दी गई थी। दुबे ने इसी संदर्भ में 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई कार्रवाई से तुलना करते हुए कांग्रेस से सवाल पूछे हैं।
हवाना बैठक को लेकर निशिकांत दुबे ने क्या कहा?
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पोस्ट में 2006 की हवाना बैठक को अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुंबई ट्रेन धमाकों के बाद देश में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग के बावजूद तत्कालीन सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया।
हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी 16 सितंबर 2006 के संयुक्त बयान के मुताबिक, मनमोहन सिंह और परवेज मुशर्रफ ने भारत-पाकिस्तान संबंधों और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी। दोनों नेताओं ने आतंकवाद की निंदा की थी और आतंकवाद से निपटने तथा जांच में सहयोग के लिए एक संस्थागत तंत्र बनाने पर सहमति जताई थी।
Kargil, PoK और Sir Creek को लेकर लगाया आरोप
भाजपा सांसद ने अपने पोस्ट में WikiLeaks से सामने आए दस्तावेजों का भी हवाला दिया। उनका आरोप है कि तत्कालीन यूपीए सरकार व्यापक कूटनीतिक समझौते के तहत Kargil, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और Sir Creek जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान को रियायत देने की दिशा में आगे बढ़ रही थी।
दुबे ने 22 सितंबर 2006 को वाशिंगटन में हुई बैठकों का भी जिक्र किया और दावा किया कि हवाना में हुई बातचीत से जुड़ी जानकारी अमेरिकी नेतृत्व के साथ साझा की गई थी। उन्होंने इसे भारत की संप्रभुता और विदेश नीति से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
हालांकि, इन दावों को खबर में आरोप के तौर पर देखना जरूरी है। उपलब्ध आधिकारिक हवाना संयुक्त बयान में Kargil, PoK या Sir Creek को पाकिस्तान को सौंपने की किसी सहमति का उल्लेख नहीं है। उस बयान में शांति प्रक्रिया, द्विपक्षीय संबंध और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर जोर दिया गया था।
2006 के मुंबई धमाकों से Operation Sindoor तक तुलना
निशिकांत दुबे ने 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया की तुलना की। उनका कहना है कि दोनों घटनाओं के बाद पाकिस्तान के संदर्भ में अपनाई गई रणनीति अलग रही।
दुबे ने कहा कि 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने Operation Sindoor के जरिए सीमा पार आतंकी ढांचे को निशाना बनाया, जबकि 2006 के मुंबई धमाकों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाया। इसी तुलना के आधार पर उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से तत्कालीन और मौजूदा नीतियों पर जवाब मांगा।
सोनिया गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना
दुबे ने अपने बयान में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि अगस्त 2006 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद पाकिस्तान के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ने का रास्ता अपनाया गया था।
भाजपा सांसद ने इसे तत्कालीन सरकार की पाकिस्तान नीति से जोड़ते हुए कहा कि उस दौर में अमेरिकी दबाव का असर भारत की विदेश नीति पर पड़ा। ये निशिकांत दुबे के राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध आधिकारिक हवाना बयान में दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया और आतंकवाद विरोधी तंत्र को आगे बढ़ाने की बात दर्ज है।
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राहुल गांधी से मांगा जवाब
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी से 2006 और 2025 की घटनाओं के बीच अंतर को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि मुंबई ट्रेन धमाकों के बाद यूपीए सरकार ने पाकिस्तान के साथ जिस तरह की कूटनीतिक पहल की, उसकी तुलना पहलगाम हमले के बाद हुई कार्रवाई से कैसे की जानी चाहिए।
इस तरह 16 सितंबर 2026 को निशिकांत दुबे के बयान के बाद 2006 की भारत-पाकिस्तान नीति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। एक तरफ भाजपा सांसद ने उस दौर की कूटनीति पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं 2006 का आधिकारिक रिकॉर्ड शांति प्रक्रिया को जारी रखने, आतंकवाद की निंदा करने और दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी संस्थागत तंत्र बनाने की सहमति की पुष्टि करता है।



