आयोग को कुल करीब 72 हजार आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। इनकी समीक्षा के लिए गठित छह सदस्यीय समिति ने विस्तृत जांच की। जांच के बाद 71 हजार से अधिक आपत्तियों को नियमों के अनुरूप न मानते हुए खारिज कर दिया गया।
चार हिस्सों में बांटी गईं शिकायतें
समिति ने प्राप्त शिकायतों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया। इनमें OMR शीट से जुड़ी त्रुटियां, नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर सवाल, आंसर की के आधार पर अंक बढ़ाने की मांग और प्रमाण पत्र में दर्ज व्यक्तिगत विवरणों की गलतियां शामिल थीं।
OMR शीट की गलती पर नहीं मिली राहत
कई अभ्यर्थियों ने अनुक्रमांक या प्रश्न पुस्तिका क्रमांक गलत भरने को लेकर राहत की मांग की थी। आयोग ने कहा कि परीक्षा से पहले सभी निर्देश स्पष्ट रूप से दिए गए थे। ऐसे में OMR शीट भरने में हुई त्रुटियों की जिम्मेदारी उम्मीदवारों की होगी और इस आधार पर किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को बताया सही
अभ्यर्थियों की ओर से नॉर्मलाइजेशन के कारण अंक कम होने की शिकायत भी सामने आई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि परीक्षा कई पारियों में आयोजित होने पर वैज्ञानिक और सॉफ्टवेयर आधारित नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसलिए अंकों में अंतर प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा।
प्रमाण पत्र में सुधार का मिलेगा अवसर
हालांकि आयोग ने सफल अभ्यर्थियों को एक महत्वपूर्ण राहत दी है। जिन उम्मीदवारों के प्रमाण पत्र में नाम, पिता या पति का नाम, जन्मतिथि अथवा श्रेणी से जुड़ी त्रुटियां हैं, उन्हें सुधार का अवसर मिलेगा। इसके लिए आयोग जल्द ही ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा।
जल्द जारी होगी सुधार सुविधा
आयोग के अनुसार, प्रमाण पत्र संबंधी त्रुटियों को ठीक कराने के लिए पोर्टल पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे उन सफल अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जिनके दस्तावेजों में तकनीकी या डेटा एंट्री संबंधी गलतियां दर्ज हो गई हैं।