Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में भारत की युवा टेकबॉल खिलाड़ी क्विंसी डिसूजा का स्वर्ण पदक का सपना फिलहाल अधूरा रह गया है। महिला एकल स्पर्धा के सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें इंडोनेशिया की खिलाड़ी सुमाया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रतियोगिता में उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है और अब वह कांस्य पदक के लिए मुकाबला करेंगी।
पहले सेट में बनाई थी बढ़त
मुकाबले की शुरुआत क्विंसी के पक्ष में रही। उन्होंने पहले सेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त हासिल कर ली थी। उनकी आक्रामक रणनीति और सटीक शॉट्स ने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को दबाव में ला दिया था। लेकिन दूसरे सेट से इंडोनेशियाई खिलाड़ी ने वापसी की और मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया।
निर्णायक सेट में क्विंसी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहरा नहीं सकीं और मुकाबला उनके हाथ से निकल गया। इसके साथ ही फाइनल में पहुंचने की उम्मीद टूट गई।
अब कांस्य पदक पर नजर
सेमीफाइनल हारने के बावजूद भारतीय खिलाड़ी के पास पदक जीतने का अवसर बना हुआ है। क्विंसी अब तीसरे स्थान के मुकाबले में उतरेंगी। इस मैच में जीत उन्हें एशियन गेम्स में टेकबॉल का ऐतिहासिक पदक दिला सकती है।
भारतीय खेल प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह दबाव को पीछे छोड़ते हुए शानदार वापसी करेंगी और देश के लिए मेडल हासिल करेंगी।
मेहनत और जुनून से बनाई पहचान
मुंबई की रहने वाली क्विंसी डिसूजा की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। वह पेशे से टेस्ट इंजीनियर हैं और खेल के साथ अपने पेशेवर जीवन को भी संतुलित करती हैं। टेकबॉल में उनकी दिलचस्पी फुटबॉल के प्रति प्रेम से शुरू हुई थी।
क्विंसी ने फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी रोनाल्डिन्हो को इस खेल को खेलते हुए देखा था, जिसके बाद उन्होंने टेकबॉल को गंभीरता से अपनाया। लगातार अभ्यास और मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
नए खेल में भारत की बढ़ती मौजूदगी
टेकबॉल को पहली बार एशियन गेम्स में शामिल किया गया है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस खेल के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्विंसी डिसूजा ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार खेल दिखाकर यह साबित किया है कि भारत इस नई खेल विधा में भी मजबूत पहचान बना सकता है।
अब सभी की निगाहें उनके कांस्य पदक मुकाबले पर हैं, जहां वह भारत के लिए इतिहास रचने की कोशिश करेंगी।



