Bhadohi: अब ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से पहचाना जाएगा जिला, सीएम योगी ने किया ऐलान

Bhadohi: मुख्यमंत्री ने कारपेट एक्सपो के मंच से की घोषणा, भदोही-औराई-ज्ञानपुर के लिए 1,340 करोड़ से अधिक की 112 परियोजनाओं का भी लोकार्पण-शिलान्यास

Bhadohi: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बड़ा ऐलान किया। अब जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने भदोही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की।

मुख्यमंत्री का यह दौरा भदोही के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। एक ओर उन्होंने जिले की पहचान से जुड़ी घोषणा की, वहीं दूसरी ओर भदोही, औराई और ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री ने मंच से बताया नया नाम

भदोही में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब भदोही जिला ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। नाम की घोषणा के साथ ही जिले के नाम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

संत रविदास के नाम से जिले की पहचान जोड़ने का फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब भदोही अपनी कालीन कला और हस्तनिर्मित कालीनों के लिए देश-विदेश में जाना जाता है।

नाम की घोषणा के साथ विकास योजनाओं की सौगात

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 112 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें 65 परियोजनाओं का लोकार्पण 440.84 करोड़ रुपये की लागत से हुआ, जबकि 47 परियोजनाओं का शिलान्यास 899.27 करोड़ रुपये की लागत से किया गया।

इन परियोजनाओं का दायरा भदोही, औराई और ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों तक है। सरकार के मुताबिक इन कार्यों से सड़क, आधारभूत ढांचे और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

गंगा पर बनेगा बड़ा पुल

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ज्ञानपुर क्षेत्र में गंगा नदी पर प्रस्तावित पुल भी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल रहा। इस पुल के निर्माण पर करीब 320.51 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।

इसके अलावा मुंशीलाटपुर में 574 बंदियों की क्षमता वाले नए जेल का भी शिलान्यास किया गया। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 209.18 करोड़ रुपये बताई गई है।

कालीन कारोबार के लिए भी बड़ा दिन

मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान भदोही में आयोजित 50वें इंटरनेशनल इंडिया कारपेट एक्सपो का उद्घाटन भी किया। यह आयोजन भदोही के कालीन कारोबार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भदोही लंबे समय से हस्तनिर्मित कालीनों के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान रखता है। एक्सपो में देश के कारोबारियों के साथ विदेशी खरीदारों की भी भागीदारी हो रही है, जिससे स्थानीय कालीन उद्योग को नए बाजार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

पुराने नाम को लेकर भी रहा है विवाद

भदोही के नाम को लेकर पहले भी बदलाव हो चुके हैं। जिले का गठन 1994 में हुआ था और इसके बाद अलग-अलग समय पर इसके नाम में संत रविदास नगर जोड़ा गया। अब मुख्यमंत्री की ताजा घोषणा के बाद एक बार फिर ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम सामने आया है।

हालांकि, किसी जिले के नाम में बदलाव की घोषणा के बाद प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर संबंधित प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। इसलिए आगे की औपचारिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

जिले की पहचान को नए नाम से जोड़ने की कोशिश

मुख्यमंत्री की घोषणा को भदोही की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर भी देखा जा रहा है। नाम परिवर्तन के साथ सरकार ने विकास परियोजनाओं और कालीन उद्योग को बढ़ावा देने की योजनाओं को भी कार्यक्रम में प्रमुखता दी।

अब भदोही जिले के सरकारी दस्तावेजों और प्रशासनिक इस्तेमाल में नए नाम को किस तरह लागू किया जाता है, यह आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होगा। फिलहाल मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम को लेकर जिले में चर्चा तेज हो गई है।

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