International News: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना की ओर मिसाइलें दागे जाने के सऊदी अरब के दावे को हूतियों ने खारिज कर दिया है। हूती विद्रोहियों का कहना है कि उनके सैन्य अभियानों का निशाना पवित्र शहर नहीं, बल्कि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठान और सैन्य ठिकाने थे। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने दावा किया है कि मक्का और मदीना की दिशा में दागी गईं बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया और उनका मलबा कई इलाकों में गिरा।
इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के दावों के बीच मिसाइलों के वास्तविक निशाने और हमलों की परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सऊदी अरब ने क्या दावा किया?
सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर दागी गईं दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया गया। सऊदी पक्ष का दावा है कि मिसाइलों के टुकड़े जेद्दा, ताइफ और रबिघ जैसे इलाकों में गिरे।
इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाए जाने की खबरें सामने आईं। मक्का और मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहर हैं। ऐसे में इनकी दिशा में मिसाइल दागे जाने का दावा धार्मिक और राजनीतिक, दोनों लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है।
हालांकि, सऊदी अरब के दावे और हूतियों के इनकार के बीच स्वतंत्र रूप से सभी परिस्थितियों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में दोनों पक्षों के बयानों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
हूतियों ने आरोपों को किया खारिज
हूती विद्रोहियों ने मक्का और मदीना को निशाना बनाने के आरोपों से साफ इनकार किया है। समूह का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का उद्देश्य सऊदी अरब की तेल सुविधाओं और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना है।
हूतियों के मुताबिक, जब भी वे किसी सैन्य अभियान को अंजाम देते हैं, तो उसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हैं। समूह ने पवित्र शहरों पर हमले के सऊदी दावे को खारिज करते हुए अपने अभियानों के लक्ष्यों को अलग बताया है।
सऊदी अरब की ओर से हूतियों के इस खंडन पर फिलहाल कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने आने की बात नहीं कही गई है। ऐसे में इस विवाद में दोनों पक्षों के दावों के बीच अंतर बना हुआ है।
तेल पाइपलाइनों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने का दावा
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के हवाले से बताया गया कि समूह ने 22 और 23 अक्टूबर को सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले किए। हूतियों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, दम्माम और नजरान के हवाई अड्डों तथा खमीस मुशैत स्थित एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया।
इसके अलावा, समूह ने सऊदी अरब की तेल पाइपलाइनों और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं पर हमले किए जाने की बात भी कही है। हालांकि, इन सभी लक्ष्यों पर हमलों के प्रभाव और नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
तेल प्रतिष्ठान सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे ठिकानों पर हमले का दावा क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार को लेकर भी चिंता पैदा कर सकता है।
क्यों संवेदनशील है मक्का-मदीना से जुड़ा विवाद?
मक्का में काबा स्थित है, जबकि मदीना इस्लाम के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। दुनियाभर से लाखों मुस्लिम श्रद्धालु हर साल इन शहरों में पहुंचते हैं। इस कारण इनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी खबर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिया जाता है।
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संघर्ष और सीमा पार हमलों का इतिहास रहा है। हूती समूह यमन में सक्रिय है और उसे ईरान का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर, सऊदी अरब यमन संघर्ष में हूतियों के विरोधी पक्ष के साथ रहा है।
मक्का और मदीना की ओर मिसाइलें दागे जाने का दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संघर्ष का धार्मिक और राजनीतिक आयाम अधिक संवेदनशील हो जाता है। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम में हूतियों ने इन शहरों को निशाना बनाने से इनकार किया है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल इस घटनाक्रम में सऊदी अरब का दावा है कि उसने मिसाइलों को हवा में नष्ट किया, जबकि हूतियों का कहना है कि उनके हमले तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों पर केंद्रित थे। दोनों पक्षों के बयानों के बीच मिसाइलों के निशाने और हमलों से हुए नुकसान को लेकर स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
यदि सऊदी अरब और हूतियों के बीच हमलों का सिलसिला जारी रहता है, तो क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और तनावपूर्ण हो सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्ष इस घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या मिसाइल हमलों से संबंधित दावों के समर्थन में अतिरिक्त जानकारी सामने आती है।



