UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की नजदीकी के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की सत्ता पर दोबारा मजबूती से काबिज होने की योजना बना रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने अपने ही कुनबे को साधने की बड़ी चुनौती खड़ी होती दिख रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल सहयोगी दल—अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP)—अपने-अपने जनाधार का हवाला देकर आगामी चुनाव में अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी ठोक रहे हैं।
बदल चुका है 2022 का समीकरण
गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ मुख्य रूप से अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) और डॉ. संजय निषाद की निषाद पार्टी ही एनडीए के मंच पर थीं। तब जयंत चौधरी की RLD और ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा समाजवादी पार्टी के गठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ी थीं। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ये दोनों दल भी एनडीए का हिस्सा बन गए। अब 2027 के महासमर में इन चार-चार मजबूत और महत्वाकांक्षी सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा करना बीजेपी के लिए बेहद जटिल राजनीतिक पहेली बन गया है।
अपना दल (S) और सुभासपा की बड़ी मांगें
अनुप्रिया पटेल की अगुवाई वाली अपना दल (एस) ने 2022 में 18 सीटों पर लड़कर 12 पर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी अपना दायरा बढ़ाते हुए 30 से 35 सीटों पर नजर टिकाए हुए है। लखनऊ, सोनभद्र, मऊ और घाटमपुर में विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन कर चुकी पार्टी 2 नवंबर को अपने राष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए अपनी ताकत का मुआयना कराएगी। वहीं, पूर्वांचल में प्रभाव रखने वाली ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा ने भी करीब 33 सीटों पर अपनी दावेदारी के संकेत दिए हैं।
आरक्षण दांव से निषाद पार्टी तो RLD की ब्रज क्षेत्र में नजर
दूसरी तरफ, निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद अपनी कौम को अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आरक्षण की मांग को लेकर हमलावर हैं। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ‘दिल्ली चलो’ सम्मेलन आयोजित कर उन्होंने बीजेपी नेतृत्व पर जल्द फैसला लेने का दबाव बनाया है, जिसे सीधे तौर पर सीटों की सौदेबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, जयंत चौधरी की RLD अब केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित न रहकर आगरा, अलीगढ़, मथुरा और हाथरस जैसे ब्रज क्षेत्र के जिलों में भी सीटें हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सहयोगियों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और अपनी सीटों को बचाने के बीच सही संतुलन साधना बीजेपी के लिए 2027 के चुनाव की सबसे पहली और बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।



