प्रयागराज । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फाइलेरिया जिसे हाथीपांव भी कहते हैं, दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को दिव्यांग बना रही है। इससे शारीरिक अंगों ही नहीं मानसिक तौर पर मरीज को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं इस घातक बीमारी के लक्षण, कारण और इससे बचने के उपाय। चिकित्सक इस संबंध में सलाह दे रहे हैं। हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डा. रवि पचौरी का कहना है कि फाइलेरिया की वजह से किसी की मौत भले ही न हो, लेकिन इस बीमारी से व्यक्ति जीवन भर के लिए परेशान हो जाता है। फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान पांच सालों तक लगातार फाइलेरिया से बचाव की दवा खानी चाहिए, जिससे कि फाइलेरिया जैसी घातक बीमारी से बचा जा सके।डा. रवि पचौरी ने बताया कि विगत दो वर्षों से जनपद प्रयागराज में विशेष फाइलेरिया अभियान जिसे आइडीए अभियान के नाम से जाना जाता है, चलाया जा रहा है। आइडीए अभियान में आइवरमेक्टिन सहित कुल तीन औषधियां एक साथ खाकर फाइलेरिया जैसे घातक रोग से मुक्ति पाई जा सकती है।जिला मलेरिया अधिकारी आनंद सिंह ने बताया कि जनपद में फाइलेरिया के अब तक कुल 1920 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें से हाथीपांव के 944 रोगी चिह्नित किए गए हैं। इस बीमारी के लक्षण दिखने में संक्रमित होने के बाद 5 से 15 वर्ष भी लग जाते हैं। इस बीमारी का कोई उपचार नहीं है। इसलिए सबसे बेहतर है कि फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया जाए। यह दवा साल में एक बार खानी होती है, जिससे फाइलेरिया से बचा जा सकता है। भारत में लगभग 65 करोड़ लोगों में इस बीमारी का संभावित खतरा माना जा रहा है।
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