जबलपुर । रबी सीजन में जब प्रदेश में बिजली की मांग अधिक है, तब बिजली उत्पादन कम हो गया है। वजह कोयले की कमी है। कई इकाइयां कोयले की कमी के कारण बंद कर दी गई हैं। वहीं बिजली ताप गृहों में दो से सात दिन का कोयला ही बचा है। मप्र पावर जनरेशन कंपनी के पास 5400 मेगावाट की कुल बिजली क्षमता है। फिलहाल 2500 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा की जा रही है। बिजली उत्पादन के लिए कोयले की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है, लेकिन मुख्य अभियंता मप्र पावर जनरेशन कंपनी राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि ताप गृहों में पर्याप्त मात्रा में कोयले की सप्लाई नहीं हो पा रही है। रेलवे की ओर से रैक कम पहुंच रहे हैं, इससे रेलवे की तरफ से नियमित सप्लाई नहीं हो पा रही है। इस कारण बिजली ताप गृहों में कोयला कम पहुंच रहा है। अफसरों का मानना है कि बारिश के वक्त ज्यादा सप्लाई नहीं हुई। अब देश में हर तरफ कोयला भेजा जा रहा है, ऐसे में थोड़ी दिक्कत आ रही है। बिरसिंहपुर के संजय गांधी ताप विद्युत गृह की एक इकाई 210 मेगावाट की कोयले की कमी के कारण बंद की गई है। इसके अलावा श्रीसिंगाजी ताप गृह की 600 मेगावाट क्षमता वाली दो नंबर की इकाई को विगत पांच जनवरी से कोयले की कमी के कारण बंद रखा गया है। मप्र में बीते 14 जनवरी को अधिकतम बिजली की मांग 11840 मेगावाट थी। वहीं 15 जनवरी की दोपहर करीब एक बजे बिजली की मांग घटकर 7680 मेगावाट पर आ गई है।
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