Albania Protests: यूरोपीय देश अल्बानिया की राजधानी तिराना इस समय भीषण सरकार विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा की चपेट में है। सड़कों पर दंगा-रोधी पुलिस और आक्रोशित प्रदर्शनकारियों के बीच भयंकर मुठभेड़ देखने को मिल रही है। राजधानी में चारों तरफ धुएं का गुबार, जलती हुई इमारतें और पुलिसकर्मियों पर दागे जा रहे आतिशबाजी के रॉकेट किसी हॉलीवुड फिल्म के थ्रिलर सीन जैसा दृश्य पेश कर रहे हैं।
आसमान में पटाखों की बौछार, आग के हवाले सरकारी इमारतें
शनिवार और रविवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान स्थिति तब बेहद विस्फोटक हो गई, जब नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने दंगा-रोधी पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर सीधे आतिशबाजी के रॉकेट, फ्लेयर्स और फायरबॉम्ब दागने शुरू कर दिए। देखते ही देखते सड़कें आग की लपटों से घिर गईं। उग्र भीड़ ने सड़कों से पत्थर उखाड़कर पुलिस पर फेंके, बैंकों व दुकानों के शीशे तोड़े और कृषि मंत्रालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर आग लगा दी।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई: आंसू गैस, वॉटर कैनन और रबर बुलेट
हिंसा को काबू में करने के लिए अल्बानियाई पुलिस प्रशासन ने बड़े पैमाने पर जवानों की तैनाती की है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगा-रोधी पुलिस बल ने लगातार आंसू गैस के गोले दागे, वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का प्रयोग किया और रबर की गोलियां चलाईं। इस झड़प में दर्जनों पुलिसकर्मी व प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं और 40 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पीएम एडी रामा के इस्तीफे की मांग
इस हिंसक आंदोलन की मुख्य वजह सरकार में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा प्रणाली की बदहाली है। छात्र संगठनों के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में अब देश का आम नागरिक भी शामिल हो चुका है। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि यूनिवर्सिटी फीस में कटौती की जाए, शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी बजट बढ़ाया जाए और शिक्षा में भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जाए। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा (Edi Rama) के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के प्रोजेक्ट से भी जुड़ा है विवाद
इस अशांति के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर का अल्बानियाई समुद्र तट पर बन रहा एक मल्टी-बिलियन डॉलर लग्जरी रिसॉर्ट प्रोजेक्ट भी है। गर्मियों के दौरान स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने इस लग्जरी प्रोजेक्ट के खिलाफ महीनों तक विरोध-प्रदर्शन किए थे। अब वही आक्रोश छात्रों के आंदोलनों के साथ मिलकर एक बड़े व्यापक सरकार विरोधी जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
पूरे यूरोप में फैल रहा असंतोष
अल्बानिया में भड़की यह हिंसा इस समय पूरे यूरोपीय महाद्वीप में फैल रहे जन-असंतोष का ही एक हिस्सा मानी जा रही है। अल्बानिया की तरह ही फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल जैसे देशों में भी महंगाई, जीवन-यापन की भारी लागत (Cost of Living), पेंशन और आवास संकट जैसे मुद्दों को लेकर आम जनता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही है।



