प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा है कि पाक्सो एक्ट एक स्पेशल एक्ट है और दंड प्रक्रिया संहिता या किसी अन्य एक्ट से इसके प्राविधान भिन्न होने पर पाक्सो एक्ट के प्राविधान ही प्रभावी माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि स्पेशल कोर्ट पाक्सो को मजिस्ट्रेट द्वारा मुकदमा विचारण के लिए कमिट किए बिना भी संज्ञान लेने की शक्ति है। स्पेशल कोर्ट को पूरा अधिकार है कि पाक्सो एक्ट के तहत किसी अपराध होने की मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर संज्ञान ले सके।हाई कोर्ट ने अभियुक्त रवि व दो अन्य की दाखिल अर्जी खारिज कर दी। साथ ही कहा कि मजिस्ट्रेट ने बिना मुकदमे पर संज्ञान लिए पत्रावली स्पेशल कोर्ट पाक्सो को अंतरित करने में कोई वैधानिक गलती नहीं है। अर्जी पर न्यायमूर्ति डा. वाईके श्रीवास्तव ने सुनवाई की।अभियुक्त के खिलाफ अलीगढ़ के खैर थाने में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद अपहरण के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। मजिस्ट्रेट ने इसे संज्ञान लिया तो पीडि़ता की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया कि इस प्रकरण में पाक्सो एक्ट व सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण के तहत भी अपराध बनता है। पीडि़ता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान की प्रति भी संलग्न किया। मजिस्ट्रेट ने इस बात से संतुष्ट होते हुए कि मामला पाक्सो एक्ट की परिधि में आता है, पत्रावली सीधे स्पेशल कोर्ट पाक्सो एक्ट को भेज दी।
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